अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर स्थानीय हिंदुस्तान स्टील एंप्लाइज यूनियन सीटू से जुड़े मजदूरों ने पूरे जोश के साथ मजदूर दिवस मनाया । मजदूर दिवस के अवसर पर सर्वप्रथम सुबह 5:30 बजे माइंस कार्यालय के सामने झंडारोहण किया गया तथा उपस्थित श्रमिकों के मध्य मिष्ठान वितरण कर खुशियां मनाई गई। इसके साथ ही 6:00 बजे यूनियन कार्यालय में भी यूनियन का झंडा रोहण किया गया तथा पूरी दुनिया में लागू शोषणकारी पूंजीवादी व्यवस्था के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मजदूरों के संघर्ष को और तीव्र करने का दृश्य संकल्प लिया गया।
शाम 4:00 बजे यूनियन कार्यालय से विशाल बाइक रैली निकली गई यह बाइक रैली माइन्स ऑफिस से होते हुए पुराना बाजार, नया बाजार, बस स्टैंड और टाउनशिप से होते हुए यूनियन कार्यालय में एक आम सभा में तब्दील हो गई। आमसभा को संबोधित करते हुए यूनियन के अध्यक्ष ज्ञानेंद्र सिंह ने कहा कि 1886 में अमेरिका के शिकागो शहर में मजदूरों के बलिदान से शुरू हुए इस मई दिवस की प्रासंगिकता आज भी कायम है।
उन्होंने कहा कि दुनिया जब तक दो धड़ों में बटी थी, तब तक समाजवादी सोवियत संघ के नेतृत्व में अधिकांश देशों में मजदूरों के हितों को ध्यान में रखते हुए कुछ कानून बनाए गए जिससे मजदूरों के हितों की रक्षा संभव हो पाई । लेकिन सोवियत संघ के विघटन के बाद से पूरी देश पूरी दुनिया में पूंजीवादी व्यवस्था ने जिस तरह पैर पसारे हैं ,उसके बाद मजदूर और आम जनता का शोषण लगातार बढ़ता जा रहा है। शोषण और शोषित वर्ग में टकराव जारी है।
उन्होंने कहा कि हमारे देश की वर्तमान सरकार भी अब पूरी तरह पूंजीवादी व्यवस्था की गिरफ्त में है और पूंजीपतियों के इशारे पर मजदूर, किसान, आम जनता के शोषण को आसान बनाने वाले नए कानून सरकारों द्वारा पारित किये जा रहे हैं। इन कानूनों के माध्यम से सरकार, प्रबंधन और कारखाना मालिकों द्वारा मजदूरों का शोषण और बढ़ता ही जा रहा है। ऐसा लगता है कि दुनिया का मजदूरवर्ग फिर से 1886 के दौर में जाने के लिए मजबूर है और उसी तरह के संघर्ष के लिए भी अब हमें तैयार रहना होगा। तभी हम मजदूर हितों की रक्षा कर पाएंगे स्थानीय स्थिति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि पिछले 5 वर्षों में खदान प्रबंधन के रवैया में जो बदलाव आया है वह पूरी तरह श्रमिक विरोधी और नकारात्मक है, प्रबंधन के साथ हुई बैठक का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि आज उन्होंने प्रबंधन के साथ बैठक में जो देखा वह पिछले 30 सालों में कभी भी देखने को नहीं मिला।
स्थानीय खदान प्रबंधन का रवैया पूरी तरह निजी प्रबंधन जैसा हो चुका है। अब प्रबंधन, मजदूरों के हर मसले को नई श्रम कानूनों के नजरिए से देखने लगा है और उसमें उपलब्ध कराए गए शोषण के साधनों का खुलकर इस्तेमाल कर रहा है। इसलिए अपने रोजगार, दल्लीराजहरा शहर, टाउनशिप और यहां के अस्पताल को बचाने के लिए हमें और बड़ी लड़ाई के लिए पूरी तैयारी करना पड़ेगा, तभी हम इस श्रमिक नगरी के सम्मान को बचा पाएंगे । बड़ा संघर्ष किए बना यहां के श्रमिकों का रोजगार, श्रमिक हित एवं शहर को बचाना काफी मुश्किल है। उन्होंने आह्वान किया की सरकार की नीतियों के आधार तीव्र शोषण के लिए तैयार प्रबंधन के खिलाफ आरपार की लड़ाई के लिए हमें तैयार रहना होगा ।
यूनियन के सचिव पुरुषोत्तम सिमैया ने कहा कि आज से सैकड़ो वर्ष पूर्व जिस 8 घंटे की मांग को लेकर मजदूरों ने शहादत दी थी और 8 घंटे के अधिकार को हासिल किया था। सरकार ने नए श्रम कोड के जरिए इन अधिकारों को भी छीनने का प्रयास किया है तथा हड़ताल जैसे बुनियादी बुनियादी अधिकारों पर भी अंकुश लगाने का षड्यंत्र रचा है। इसके खिलाफ पूरे देश का मजदूर वर्ग लामबंद है, और अलग-अलग जगह पर अलग-अलग तरह के आंदोलन हो रहे हैं।
हाल ही में नोएडा में जो आंदोलन हुआ वह इसी शोषणकारी व्यवस्था का परिणाम है। उन्होंने कहा कि अब वह दिन दूर नहीं जब देश के समूचे मजदूर वर्ग को एक जुट होकर इस पूंजीवादी व्यवस्था के खिलाफ टकराव के लिए तैयार रहना होगा। वर्तमान केंद्र सरकार मोटा चंदा देने वाले पूंजीपतियों के इशारे पर देश के किसान, मजदूर एवं आम जनता के खिलाफ कार्य कर रही है। जिसे समझ कर हमें सरकार को मुंहतोड़ जवाब देना होगा। पूरे देश में रोजगार के अवसर समाप्त कर, रोजगार की गुणवत्ता को निम्र्तर स्तर तक ला दिया गया है। जहां मिलने वाली मजदूरी से अब परिवार का गुजारा भी संभव नहीं है, इसलिए इस बार का मई दिवस और भी अधिक प्रासंगिक तथा हमें दृढ़ संकल्पित करने वाला है ।
यूनियन के संगठन सचिव प्रकाश क्षत्रिय ने कहा कि आम जनता के खून पसीने से बनाए गए तमाम सार्वजनिक उद्योगों को अपने पूंजीपति मित्रों को सौंपने के लिए सरकार ने सार्वजनिक उपक्रमों को कमजोर करने का काम किया है। ताकि इन्हें घाटे में लाकर बेचा जा सके, इसी के तहत अब भिलाई इस्पात संयंत्र में भी श्रम शक्ति में अप्रत्याशित कटौती का फरमान सरकार ने जारी किया है। इसके बाद उत्पादन के स्तर को बनाए रखना संभव नहीं होगा और संयंत्र की उत्पादन व्यवस्था अंत तक घाटे में की ओर जाएगी और फिर घाटे का बहाना बनाकर इस सर्वजानिक उद्योग को निजीकरण की ओर धकेल दिया जाएगा। जिससे हजारों की तादाद में ठेका श्रमिक बेरोजगार होंगे और यहां के व्यापार पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा
इसलिए सरकार की इन नीतियों के खिलाफ केवल मजदूर वर्ग नहीं बल्कि किसान और व्यापारियों को भी मैदान में आना होगा तभी हम इस सार्वजनिक उद्योग को बचाने में सफल हो पाएंगे उन्होंने कहा कि सेल, भिलाई इस्पात संयंत्र समेत खदान प्रबंधन का रवैया भी अब पूरी तरह नकारात्मक हो चुका है। टाउनशिप अस्पताल सभी बर्बादी कीओर हैं, फिर भी प्रबंधन यूनियन के सुझावों पर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है । इससे यह प्रतीत होता है कि प्रबंधन एक सोची समझी रणनीति के तहत अब दल्लीराजहरा से अपना कारोबार समेटना चाहता है। इसलिए केवल खदान के मजदूरों को नहीं बल्कि इस क्षेत्र की जनता को भी इस खतरे को समझना होगा, और एक विशाल जन आंदोलन खड़ा करते हुए हमें आगे बढ़ना पड़ेगा। तभी हम यहां की खदानों, टाउनशिप अस्पताल, रोजगार और व्यापार को बचा पाएंगे। अन्यथा सब कुछ हमारी मुट्ठी से रेत की तरह फिसल जाएगा और हम देखते रह जाएंगे।
आगे उन्होंने कहा कि पूरे देश में सीटू सरकार की जन विरोधी नीतियों के तहत मजदूरों की लामबंदी कर लगातार संघर्षरत है, और हम भी दल्ली राजहरा में लगातार संघर्षरत हैं । जल्द ही सीटू खदान प्रबंधन के नकारात्मक रवैया के खिलाफ विशाल आंदोलन खड़ा करने के लिए दृढ़ संकल्पित है । जिसमें खदान के सभी मजदूर आसपास की जनता को भी शामिल किया जाएगा । आज मजदूर दिवस पर उपस्थित जन समूह ने सरकार और प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए संघर्षों को और तीव्र करने का संकल्प लिया, और कहा कि शोषण के खिलाफ हमारा संघर्ष अंतिम दम तक निरंतर जारी रहेगा ।
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