ताज़ा ख़बरें

पटवारी संघ का फूटा गुस्सा नाक रगड़ कर बल्देवगढ़ तहसील में विरोध प्रदर्शन किया

टीकमगढ़ जिला ब्यूरो चीफ सुरेश कुमार चौधरी

 

नाक रगड़कर  पटवारी संघ का फूटा गुस्सा, बल्देवगढ़ तहसीलदार अनिल गुप्ता के समक्ष नाक रगड़ कर विरोध प्रदर्शन जताया

 

लंबित वेतनमान, डीए एरियर और नियमितीकरण की मांग पर पटवारी संघ सख्त; बोले—अब आर-पार की लड़ाई

 

 

टीकमगढ़। जिले में लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर पटवारी संघ का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। बुधवार को बल्देवगढ़ तहसील में पटवारी संघ ने अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन कर प्रशासन का ध्यान खींचने की कोशिश की। संघ के पदाधिकारी तहसीलदार को ज्ञापन सौंपने पहुंचे, लेकिन इस बार विरोध सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहा—जिला अध्यक्ष चंद्रभान समारी ने तहसीलदार अनिल गुप्ता के सामने नाक रगड़कर अपनी नाराजगी दर्ज कराई।

इस दृश्य ने तहसील परिसर में मौजूद सभी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। पटवारी संघ का कहना है कि कई बार ज्ञापन देने, अधिकारियों से चर्चा करने और प्रशासन को लगातार अवगत कराने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया। इसी उपेक्षा से आहत होकर उन्होंने यह प्रतीकात्मक विरोध किया।

संघ की प्रमुख मांगों में 10, 20, 30 और 35 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके पटवारियों को समयमान वेतनमान का लाभ देना शामिल है। इसके साथ ही पुराने महंगाई भत्ते (डीए) का लंबित एरियर कई कर्मचारियों को अब तक नहीं मिला है, जिसे तत्काल जारी करने की मांग उठाई गई है।

पटवारी संघ ने नए नियुक्त पटवारियों के नियमितीकरण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। संघ का कहना है कि संविदा अवधि समाप्त होने के बाद भी कई पटवारियों को नियमित नहीं किया गया, जिससे उनमें असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि तय समय सीमा में नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी की जाए।

जिला अध्यक्ष चंद्रभान समारी ने बताया कि इससे पहले कलेक्टर को भी ज्ञापन सौंपा गया था। कलेक्टर द्वारा एसडीएम और तहसीलदारों को सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक कोई ठोस समाधान नहीं हुआ। यही कारण है कि अब संघ ने जिले की सभी तहसीलों में जाकर चरणबद्ध विरोध का निर्णय लिया है।

पटवारी संघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है। फिलहाल बल्देवगढ़ तहसील में नाक रगड़कर किया गया यह विरोध प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा सवाल छोड़ गया है—क्या अब भी मांगें अनसुनी रहेंगी, या समाधान की दिशा में ठोस कदम उठेंगे।

Show More
Back to top button
error: Content is protected !!