*महाशिव रात्रि पर निकली भोले शंकर की बारात, हर ओर हर-हर बम-बम की रही गूंज, भूत-प्रेत सब रहे बाराती*
वन्दे ! भारत
उत्तर प्रदेश के कानपुर महानगर में महाशिवरात्रि के पावन मौके पर शुक्रवार को शिवालयों में भक्तों की भारी भीड़ लगी रही। शिव लिंग जल चढ़ाने को लेकर सुबह से ही लाखों भक्तों की भीड़ लाईन में लगी रही।वहीं लाल बंगला में भगवान शंकर की शिव बारात निकाली गई। शिव बारात में विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना भी शामिल हुए। उन्होंने भगवान शंकर और माता पार्वती के रथ का पूजन किया। इसके बाद शिव बारात निकली।
बरात में हर-हर बम-बम के जयकारे की उद्धघोष से पूरा इलाका सराबोर रहा। शिव बारात सात किमी का सफर पूरा करते हुए जाजमऊ के सिद्धेश्वर मंदिर पहुंची। इस मौके पर बरातियों का लोगों ने स्वागत किया। शिव बरात में नंदी पर बैठकर भगवान शिव व पार्वती की झांकी निकली तो उनके साथ नाचते-गाते भूत-प्रेत और सैकड़ों शिवभक्तों ने जयकारों से माहौल को शिवमय कर दिया। शिव बरात में हाथी, घोड़ा, ऊंट, नंदी बैल, सपेरा मदारी सरीखे विभिन्न प्रतिरूप शामिल थे। पिछले कई वर्षों से अमरनाथ सेवा मंडल की ओर से सांस्कृतिक आयोजनों के बीच सैकड़ों की संख्या में शिव भक्त बरात लेकर निकले।
कानपुर में भी कई ऐसे मंदिर हैं जो बेहद ऐतिहासिक और पौराणिक हैं जहां पर बड़ी संख्या में भक्तगण दर्शन करने पहुंचते हैं।
*कानपुर के कुछ प्रसिद्ध शिव मंदिर*
*आनंदेश्वर मंदिर*
कानपुर का सबसे प्रसिद्ध शिव मंदिर आनंदेश्वर मंदिर है यह कानपुर के परमट क्षेत्र में गंगा किनारे बसा हुआ है जहां पर प्रत्येक सोमवार को बड़ी संख्या में भक्तगण दर्शन करने जल और दूध का अभिषेक करने पहुंचते हैं शिवरात्रि पर यहां पर दूर-दूर से लाखों भक्त दर्शन को आते हैं। प्राचीन समय में यहां पर एक विशाल टीला हुआ करता था।यहां पर राजा की कई गाएं चरने के लिए आती थी उन्ही में से एक आनंदी गाय थी जो उस टीले पर जा कर अपना दूध बहा देती थी। राजा ने गाय के खुद ब खुद दूध बहा देने का रहस्य जानने के लिए राजा ने टीले की खुदाई करवाई। कहते हैं दो दिन की खुदाई के बाद उस टीले से एक शिवलिंग निकला, भोलेनाथ का शिवलिंग देख राजा ने उस शिवलिंग की स्थापना तब से इस मंदिर का नाम आनंदेश्वर मंदिर पड़ा।
*सिद्धनाथ मंदिर*
जाजमऊ स्थित सिद्धनाथ मंदिर जो गंगा किनारे स्थापित है। इस मंदिर से जुड़ी भी महाभारत काल की कई मान्यताएं हैं। बताया जाता है जब एक बार सिद्धनाथ गंगा घाट पर यज्ञ कर रहे थे।भगवान शिव के शिवलिंग को स्थापित कर रहे थे। तभी वहां एक कौवे ने आकर किसी जीव की यज्ञ कुंड में हड्डी गिरा दी थी। यज्ञ भंग हो गया था। लेकिन भगवान शिव का स्थापित शिवलिंग यहां आज भी मौजूद है। इस मंदिर को छोटी काशी के नाम से भी जाना जाता है।
*जागेश्वर मंदिर*
नवाबगंज चिड़िया घर के पास जागेश्वर मंदिर स्थित है। जागेश्वर बाबा का मंदिर एक टीले नुमा जगह पर बना हुआ है। जिस पर ऊंचाई पर चढ़ जाना पड़ता है।
*नागेश्वर मंदिर*
कानपुर के नया गंज में बाबा नागेश्वर का मंदिर स्थित है। इस मंदिर का जिक्र शिव महापुराण में भी किया गया है। यह शिव मंदिर शिव पंचायती मंदिर है। भगवान भोलेनाथ के पंच यहां पर पंचायत लगाकर देवी देवता व असुरों के बीच हुए विवाद का निस्तारण करते थे। भगवान शिव जो फैसला कर देते थे वहीं अंतिम फैसला होता था। इस मंदिर की खास बात यह है कि जब रात्रि में भोग और आरती के बाद मंदिर के पट बंद कर दिए जाते हैं। इसके बाद जब सुबह मंदिर खोला जाता है, तो वहां शिलिवलिंग पर फूल चढ़ा हुआ मिलता है।
*झगडे़श्वर मंदिर*
कालपी रोड पर झगडे़श्वर मंदिर में विराजे हैं झगडे़श्वर महादेव। इसके पीछे की कहानी काफी रोचक है। महादेव का यह छोटा सा मंदिर तीस साल से भी ज्यादा पुराना है। इलाके के लोगों की मानें तो जब यह मंदिर बनाया जा रहा था तब इसको लेकर लोगों में काफी वाद-विवाद हुआ था। इस जगह पर मिश्रित आबादी के लोगों के बीच अक्सर झगडे़ होते रहते हैं। दंगे भी हो चुके हैं। इसी वजह से इस मंदिर का नाम झगड़ेश्वर महादेव मंदिर पड़ गया।
*थानेश्वर महादेव मंदिर*
बिठूर में स्थित थानेश्वर महादेव मंदिर कई सालों तक बेनाम ही था। बिठूर के ध्रुव टीले के पास एक प्राचीन मंदिर में चोरों ने हांथ साफ किया पुलिस को झाड़ियों में शिवलिंग मिला जिसे पुलिस अधिकारियों ने बिठूर थाने के कार्यालय के सामने परिसर में बने एक मंदिर में स्थापित करा दिया। तब से थानेश्वर महादेव मंदिर नाम दे दिया।
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