
नगर परिषद घोड़ा डोंगरी की स्टोर शाखा में रखा आग को आमंत्रित करता सैकड़ो लीटर डीजल पेट्रोल
घोड़ा डोंगरी की धरती पर एक दीवार खड़ी है पर यह दीवार सुरक्षा की नहीं संवेदनशीलता की दीवार है……
इस दीवार के तीनों और नगर के भोले भाले लोग अमन चैन और सुकून से रह रहे हैं और चौथी और नगर की सड़क उस पर राहगीर है…
नगर परिषद की स्टोर शाखा जिसमें मौत का सामान डीजल, पेट्रोल जो किसी भी दिन भोले भाले लोगों की जिंदगी तहस-नहस कर मौत का तांडव कर सकता है
*घोड़ा डोंगरी नगर परिषद में दीवार भर की दूरी क्या मौत और भोले भाले लोगों के बीच सांस भर की दूरी है*
*कानून कहता है पर जमीन पर कौन सुनता है?*
भारत सरकार पेट्रोलियम अधिनियम 2002 के तहत डीजल, पेट्रोल के भंडारण के लिए जिला प्रशासन और पेट्रोलियम विस्फोटक सुरक्षा संगठन PESO से लाइसेंस की अनुमति आवश्यक होती है
पर घोड़ा डोंगरी नगर परिषद में यह नियम शायद हवा में लिखा गया होगा क्योंकि यहां दीवार के उस पार ईंधन है और उस पार भोले भाले नगर वासी और राहगीरों की जिंदगी…..
यह नगर परिषद की स्टोर शाखा नहीं मौत की सीमा है दीवार क्या किसी हादसे को रोक सकती है
आग को क्या फर्क पड़ता है उसके सामने रिहायशी क्षेत्र हो या सड़क कहीं एक चिंगारी उठी और पूरा परिवार और राहगीर तहस नहस
👉*प्रशासन मौन है क्यों*
क्योंकि शायद मौन ही सरकारी भाषा बन चुकी है
फाइल में सब सुरक्षित है बस रिहायशी क्षेत्र में लोग और राहगीर ही असुरक्षित है
*नियम या मनमर्जी का लाइसेंस*
👉अब प्रश्न यह उठता है कि क्या नगर परिषद के पास सैकड़ो लीटर डीजल, पेट्रोल का भंडारण स्टॉक रखने की अनुमति मिली है
👉अनुमति नहीं मिली है तो अवैध भंडारण पर कार्रवाई क्यों नहीं?
👉क्या इतनी गंभीर लापरवाही किसी अधिकारी के संज्ञान या जानकारी में नहीं है?
👉क्या नगर परिषद के पास ज्वलनशील पदार्थ सुरक्षित रखने के पुख्ता इंतजाम है।
👉क्या जिम्मेदार लापरवाही की मूर्ति बनाकर नगर परिषद में बैठे हैं?
👉क्या हम दीवारों से सुरक्षा खरीद लेंगे
मुझे याद है कि प्रख्यात और वरिष्ठ जाने-माने पत्रकार *”डॉ वेद प्रकाश वैदिक”* अक्सर कहां करते थे
हम नियम बनाते हैं पर उसे लागू करने की हिम्मत नहीं रखते
यह मामला भी इस विडंबना का जीता जागता उदाहरण है
यहां कानून है
आदेश है
सरकारी मोहर है
बस जिम्मेदारी नहीं
*नगर परिषद से चंद मीटर की दूरी पर पेट्रोल पंप फिर नगर परिषद को डीजल पेट्रोल की भंडारण की आवश्यकता क्यों*
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार
👉नगर परिषद से चंद मीटर की दूरी पर पेट्रोल पंप फिर नगर परिषद को डीजल पेट्रोल भंडारण की आवश्यकता क्यों
घोड़ा डोंगरी नगर के मुख्य मार्ग पर और नगर परिषद से चंद मीटर की दूरी पर पेट्रोल पंप है फिर भी नगर परिषद में सैकड़ो लीटर डीजल, पेट्रोल का भंडारण नगर परिषद की स्टोर शाखा में कर रही है जो जनता की समझ के परे है।
*नियमों का उल्लंघन या नियमों की अज्ञानता*
बिना लाइसेंस के ईंधन डीजल, पेट्रोल स्टॉक करने पर पेट्रोलियम अधिनियम 1934 के तहत कार्यवाही की जा सकती है पर यहां सारे नियम कानून ठेंगे पर
*नगर पालिका में डीजल ,पेट्रोल के लिए क्या नियम है*
नगर पालिकाओं में समस्त वाहनों को डीजल पेट्रोल लाक बुक अद्यतन अनुसार प्रत्येक वाहन को डीजल पर्ची इशू नोट वाहन के डिमांड अनुसार जारी किया जाता है पर नगर परिषद घोड़ा डोंगरी में बिल्कुल नियम से उलट है इकट्ठा सैकड़ो लीटर ईंधन प्लास्टिक की कुप्पियों में भरकर स्टोर शाखा में रखा जा रहा है और प्रत्येक वाहनों को पांच-पांच लीटर डीजल पेट्रोल दिया जा रहा है यहां ऐसा क्यों किया जा रहा है नगर की जनता का बस एक ही सवाल इतनी बड़ी लापरवाही में कहीं शुभ लाभ का खेला तो नहीं

