
🚨 बड़ी खबर | न्यायालय की अहम टिप्पणी 🚨
“एक बार किसी पराए पुरुष के साथ रात बिताना अपने-आप में व्यभिचार नहीं” – गुजरात हाई कोर्ट
अहमदाबाद गुजरात से राजेश कुमार यादव की खास रिपोर्ट
अहमदाबाद। वैवाहिक विवाद से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के दौरान Justice J.B. Pardiwala और Justice A.C. Rao की पीठ ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि किसी महिला ने किसी परिस्थिति में किसी अन्य पुरुष के साथ एक रात बिताई है, तो मात्र इसी आधार पर उसे व्यभिचार (Adultery) नहीं माना जा सकता।
यह टिप्पणी सुनवाई के दौरान Gujarat High Court की डिवीजन बेंच ने दी। अदालत ने कहा कि कई बार परिस्थितियों के कारण कोई व्यक्ति किसी दूसरे के साथ रह सकता है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि दोनों के बीच अवैध या विवाहेतर संबंध हैं।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि विवाहेतर संबंध का आरोप लगाया जाता है, तो उसे साबित करने के लिए लगातार और स्पष्ट शारीरिक संबंधों के पुख्ता प्रमाण होना जरूरी है। केवल एक बार साथ रहने या रात बिताने की घटना के आधार पर किसी महिला को दोषी ठहराना न्यायसंगत नहीं है।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि वैवाहिक विवादों में पति-पत्नी के बीच अक्सर गंभीर आरोप लगाए जाते हैं, लेकिन न्यायालय का कर्तव्य है कि वह केवल आरोपों के आधार पर नहीं बल्कि ठोस साक्ष्यों और परिस्थितियों के आधार पर ही फैसला दे।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत की इस टिप्पणी से यह स्पष्ट संदेश जाता है कि किसी भी व्यक्ति के चरित्र पर बिना ठोस प्रमाण के सवाल उठाना उचित नहीं है और अदालतें हर मामले में व्यक्ति की गरिमा और कानून के सिद्धांतों को ध्यान में रखकर ही निर्णय देती हैं।
गुजरात हाई कोर्ट फोटो 

