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लखनऊ/देवरिया। “?रेट फिक्स . न्याय फेल ” _बरहज के घूसखोर एसडीएम बिपिन द्विवेदी निलंबित विभागीय जांच के आदेश से मचा भूचाल। लखनऊ/देवरिया उत्तर प्रदेश से राजेश कुमार यादव की खास रिपोर्ट

“रेट फिक्स, न्याय फेल!” — बरहज के घूसखोर एसडीएम बिपिन द्विवेदी निलंबित, विभागीय जांच के आदेश से मचा भूचाल

लखनऊ/देवरिया से राजेश कुमार यादव की खास रिपोर्ट

देवरिया जनपद के बरहज तहसील में भ्रष्टाचार का बड़ा चेहरा उजागर होते ही प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। एसडीएम बिपिन द्विवेदी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, साथ ही पूरे मामले की गहराई से जांच के लिए विभागीय जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं।

“फाइल चलानी है तो कीमत चुकाओ!”

सूत्रों के अनुसार, एसडीएम बिपिन द्विवेदी पर गंभीर आरोप हैं कि वे किसी भी फाइल का डिस्पोजल अपने पक्ष में करने के लिए मोटी रकम वसूलते थे। फरियादियों का कहना है कि बिना “सेटिंग” के फाइल महीनों धूल फांकती रहती थी, जबकि पैसे देने पर वही फाइल चंद दिनों में पास हो जाती थी।

बताया जा रहा है कि हर फाइल का एक तय रेट था, और यह खेल लंबे समय से चल रहा था।

वकील की मौत के बाद खुली पोल

बरहज में एक वकील की संदिग्ध मौत के मामले में जब जांच हुई, तो प्रशासनिक लापरवाही के साथ-साथ कई ऐसे तथ्य सामने आए जिन्होंने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए। इसी जांच के दौरान एसडीएम की कार्यशैली पर गंभीर संदेह गहराया और मामला शासन तक पहुंचा।

जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य

उच्चाधिकारियों द्वारा मांगी गई रिपोर्ट में यह संकेत मिले कि:

फाइलों के निस्तारण में पारदर्शिता की कमी थी

शिकायतों को जानबूझकर लंबित रखा जाता था

“पैसा दो, काम लो” की संस्कृति हावी थी

इन तथ्यों के सामने आते ही शासन ने सख्त रुख अपनाते हुए निलंबन की कार्रवाई की।

जनता में गुस्सा, कार्रवाई का स्वागत

एसडीएम के निलंबन की खबर फैलते ही क्षेत्र में चर्चा का माहौल गरमा गया। आम जनता और पीड़ितों ने इस कार्रवाई को “देर से सही, लेकिन सही कदम” बताया। लोगों का कहना है कि अगर पहले ही कार्रवाई होती, तो कई लोग शोषण से बच सकते थे।

आगे क्या?

अब सबकी नजर विभागीय जांच पर टिकी है। अगर आरोप सिद्ध होते हैं, तो:

सेवा से बर्खास्तगी तक की कार्रवाई हो सकती है

अन्य संबंधित अधिकारियों की भी भूमिका जांच के दायरे में आ सकती है

भ्रष्टाचार के बड़े नेटवर्क का खुलासा संभव है

यह मामला साफ करता है कि भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, लेकिन साथ ही यह भी संकेत देता है कि अब सिस्टम में सफाई की शुरुआत हो चुकी है।

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