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प्रैस कान्फ्रेंस में महिलाओं के 33%आरक्षण संवैधानिक अधिकार पर रखीं गई बात। नारी शक्ति वंदन अधिनियम से देश में महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा उठाया गया ऐतिहासिक कदम, पूर्व विधायक विनोद पंथी।

* प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिलाओं के 33% आरक्षण संवैधानिक अधिकार पर रखी गई बात।नारी शक्ति वंदन अधिनियम से देश में महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में उठाया गया ऐतिहासिक कदम – पूर्व विधायक विनोद पंथी।*

टीकमगढ़।आज भाजपा की प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिलाओं से जुड़े आरक्षण के संवैधानिक अधिकार पर वार्ता हुई जहां नारी शक्ति वंदन अधिनियम से महिलाओं की सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। भाजपा मीडिया प्रभारी स्वप्निल तिवारी ने बताया कि आज नगर भाजपा कार्यालय में नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2026 विषय पर महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस संपन्न हुई, जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में पूर्व विधायक श्रीमती विनोद पंथी , जिला प्रभारी पुष्पेंद्रनाथ गुड्डन पाठक, भाजपा जिलाध्यक्ष श्रीमती सरोज राजपूत, महिला मोर्चा अध्यक्ष विभा श्रीवास्तव, सुशीला राजपूत,पूनम अग्रवाल, रिंकी भदौरा, संध्या सोनी, मीरा खरे, मनोज देवलिया, अश्वनी चढ़ार, शिवचरण उटमालिया व आदित्य उटमालिया शामिल हुए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में आभार भाजपा जिलाध्यक्ष श्रीमती सरोज राजपूत ने किया।मुख्य वक्ता के रूप में पूर्व विधायक श्रीमती विनोद पंथी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा सरकार द्वारा नारी शक्ति वंदन अधिनियम से महिलाओं की देश में महत्त्वपूर्ण भागीदारी सुनिश्चित की गई है। कभी-कभी किसी निर्णय से देश का भाग्य बदलने की क्षमता होती है , हम ऐसे ही निर्णय की साक्षी बन रहे हैं, जिस बात का देश को पिछले कई दशकों से इंतजार था वह सपना अब साकार हुआ है, यह पूरे देश के लिए बहुत ही खास समय तो है ही साथ ही यह मातृशक्ति के लिए भी अविस्मरणीय क्षण है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल एक कानून नहीं बल्कि सदियों से प्रतीक्षित उसे सामाजिक न्याय की प्रतिज्ञा है जिसे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने धरातल पर उतारा है , यह विधेयकमहिलाओं को केवल वोट बैंक समझने वाली मानसिकता को ध्वस्त कर उन्हें नीति निर्धारण और नेतृत्वकारी भूमिका में बैठने का ऐतिहासिक काम करेगा।यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस गारंटी का प्रमाण है जिसमें दशकों से राजनीति के हासिये पर खड़ी भारत की बेटियों को लोकसभा और विधानसभा में 33% आरक्षण का संवैधानिक अधिकार देकर उन्हें राष्ट्र का भाग्य विधाता बना दिया है। सरकार 2023 के मूल कानून में संशोधन कर रही है ताकि आगामी जनगणना और उसके बाद होने वाले पूर्ण परिसीमन चक्र के इंतजार की शर्त को हटाया जा सके, हमारा लक्ष्य है कि 2029 में जब देश नई सरकार चुनेगा तब संसद की गलियारों में 33% सीटों पर नारी शक्ति की गूंज सुनाई देगी। नारी शक्ति वंदन अधिनियम स्वतंत्र भारत के इतिहास का यह स्वर्णिम अध्याय है जो हमारी माताओं- बहनों को याचक से नायक की भूमिका में स्थापित करेगा। सालों से संसद की दहलीज पर खड़ी भारत की बेटियों का इंतजार अब खत्म हुआ है क्योंकि यह अधिनियम उन्हेंवह राजनीतिक समर्थ्य दे रहा है जहां वे स्वयं अपने और देश के भविष्य का फैसला करेंगी। नारी शक्ति वंदन अधिनियम नए भारत की नई लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता का उद्धोष है , यह बहुत बड़ा और मजबूत कदम है, ये अमृत काल में सबके प्रयास से विकसित भारत के निर्माण की तरफ बड़ा कदम है। कांग्रेस ने दशकों तक महिला आरक्षण के नाम पर देश की आंखों में धूल झोंकी है , उनके लिए यह विधेयक केवल चुनावों के घोषणा पत्र का पन्ना मात्र था जिसे उन्होंने कभी नीयत के साथ लागू नहीं किया।आज कांग्रेस को जवाब देना होगा कि जिस देश में उन्हें दशकों तक पूर्ण बहुमत और निर्बाध सत्ता सौंपी , सांसदमें उसे देश की महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कोई कदम क्यों नहीं उठाया। कांग्रेस ने 1996 से 2014 के बीच केवल राजनीति की, में राज्यसभा में बिल पास होने के बावजूद सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने इसे अगले 4 साल तक लोकसभा में पेश तक नहीं किया क्योंकि उनके लिए महिलाओं का हक नहीं बल्कि अपनी कुर्सी और गठबंधन की मजबूरियां अधिक महत्वपूर्ण थी। नारी शक्ति कांग्रेस से पुकार रही बहुमत भी तुम्हारा था और हुकूमत भी तुम्हारी थी फिर क्यों 70 सालों तक नारी शक्ति हारी थी, तुम तुष्टीकरण में अपना भविष्य बुनते रहे देश की बेटियां हक मांगती रही और तुम अनसुना करते रहे। कांग्रेस के लिए महिला सशक्तिकरण का मतलबकेवल अपने खानदान की विरासत को आगे बढ़ाना था ,लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के माध्यम से भारत की उस सामान्य पृष्ठभूमि वाली बेटी के लिए संसद के द्वार खोले जिसके पास कोई राजनीतिक विरासत नहीं है। 1998 से 2003 के बीच अटल बिहारी वाजपेई के नेतृत्व बाली एनडीए सरकार ने इस विधेयक को पारित करने के लिए चार अलग-अलग प्रयास किए, उनके हर प्रयास को विफल किया गया उन्हीं गठबंधन सहयोगियों द्वारा जिनके साथ आज कांग्रेस खड़ी है। विगत 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत महिला नेतृत्व आधारित विकास मॉडल की ओर अग्रसर हुआ है।जिस देश में महिलाएं बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसती थी बहमोली सरकार ने 12 करोड़ से अधिक इज्जत घर शौचालय बनाकर उनकी गरिमा की रक्षा की, उज्ज्वला योजना के जरिए 10.33 करोड़ महिलाओं को धुंए से मुक्ति मिली और 73% पीएम आवास सीधे महिलाओं के नाम पर रजिस्टर्ड किए गए जिससे उन्हें संपत्ति का मालिकाना हक मिला। आज देश की 10 करोड़ महिलाएं स्वयं सहायता समूह से जुड़ी है जिन्हें 11 लाख करोड़ की वित्तीय मदद दी जा रही है,35 करोड़ से अधिक मुद्रा लोन और लखपति दीदी बनाने का संकल्प यह दर्शाता है कि मोदी राज में नारी अब सिर्फ घर नहीं बल्कि देश की अर्थव्यवस्था चल रही है।स्टैंड अप इंडिया जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के तहत 80% लाभार्थी हमारी बहनें और बेटियां हैं, पीएम मुद्रा योजना के तहत भी लगभग 70% ऋण महिलाओं के लिए स्वीकृत किए गए हैं। आज भारत में पुरुषों की तुलना में अधिक महिलाएं उच्च शिक्षा में दाखिला ले रही है, हमारे पास नागरिक उड्डयन में सबसे अधिक संख्या में महिला पायलट है, वहीं भारतीय वायु सेना में महिला पायलट अब लड़ाकू विमान उड़ा रही है। हमारी सरकार ने सवेतन मातृव्य अवकाश को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह किया है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने यह ऐतिहासिक पल देखा जब श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के रूप में देश को अपनी पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति मिली। नारी शक्ति अधिनियम इस बात का उद्घोष है नया भारत अब अपनी बेटियों के नेतृत्व में आगे बढ़ेगा। भाजपा सरकार लगातार महिलाओं की सशक्तिकरण को मजबूती प्रदान कर रही है।

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