
*जिला रिपोर्टर सुरेश कुमार चौधरी टीकमगढ़*
*दिनांक : 12 फरवरी 2026*
*जब पुलिस बनी परिवारों की संरक्षक — पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर रिश्तों को जोड़ने की अनूठी पहल”परिवार जोड़ो अभियान”*
*संवेदनशील पुलिसिंग का मानवीय स्पर्श — “परिवार जोड़ो अभियान” से फिर लौटी एक परिवार की मुस्कान*
*बिखरते घरों को मिला सहारा — “परिवार जोड़ो अभियान” से अब तक 80 परिवार हुए एकजुट*
*संवाद आधारित पहल का प्रभाव — दहेज प्रताड़ना मामलों में 54.12% की ऐतिहासिक गिरावट*
*महिला थाना की संवेदनशील काउंसलिंग से पुनः एकजुट हुआ परिवार*
पुलिस अधीक्षक जिला टीकमगढ़ *श्री मनोहर सिंह मंडलोई* के दूरदर्शी एवं संवेदनशील नेतृत्व में संचालित *“परिवार जोड़ो अभियान”* आज जिले में संवाद-आधारित पुलिसिंग का एक प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा है।
यह अभियान इस विचार पर आधारित है कि हर पारिवारिक विवाद केवल कानूनी प्रक्रिया से नहीं, बल्कि *संवाद, सहानुभूति, परामर्श और विश्वास* के माध्यम से भी सुलझाया जा सकता है।
टीकमगढ़ पुलिस कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाते हुए अपने सामाजिक दायित्व को भी समान प्राथमिकता दे रही है—ताकि टूटते रिश्तों को संभाला जा सके और बिखरते परिवारों को फिर से एकजुट किया जा सके।
*संवाद और काउंसलिंग से समाधान — पुलिस बनी रिश्तों की संरक्षक*
“परिवार जोड़ो अभियान” अनेक परिवारों के लिए *आशा की नई किरण* सिद्ध हुआ है। इस पहल के अंतर्गत पारिवारिक विवादों में कानूनी कार्रवाई से पूर्व दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर धैर्यपूर्वक संवाद, काउंसलिंग और भावनात्मक मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है।
अब तक जिले में *80 परिवार* पुनः एकजुट हो चुके हैं। यह केवल एक आँकड़ा नहीं, बल्कि उन घरों में लौटी *मुस्कान, विश्वास और आत्मीयता* की जीवंत कहानियाँ हैं।
👉 *महिला थाना टीकमगढ़ की संवेदनशील पहल — एक और परिवार टूटने से बचा*
हाल ही में महिला थाना टीकमगढ़ में प्राप्त एक पारिवारिक विवाद में दोनों पक्षों द्वारा एक-दूसरे के विरुद्ध शिकायत प्रस्तुत की गई थी।
महिला थाना द्वारा दोनों पक्षों को धैर्यपूर्वक बुलाकर विस्तार से काउंसलिंग एवं समझाइश दी गई। संवेदनशील संवाद, सहानुभूतिपूर्ण सुनवाई और संतुलित मार्गदर्शन के परिणामस्वरूप दोनों पक्ष *राज़ी-खुशी से पुनः साथ रहने* के लिए सहमत हुए।
इस प्रयास से *एक और परिवार टूटने से बच गया* — जो मानवीय पुलिसिंग का सशक्त उदाहरण है।
महिला थाना की यह परंपरा निरंतर जारी है, जहाँ कानून के साथ-साथ करुणा भी समान रूप से उपस्थित रहती है।
📊 सकारात्मक परिणाम — भरोसे की दिशा में मजबूत कदम
▪️ *80 परिवार* पुनः एकजुट
▪️ *दहेज प्रताड़ना के मामलों में 54.12% की उल्लेखनीय कमी*
▪️ वर्ष 2024 — *109 प्रकरण*
▪️ वर्ष 2025 — *50 प्रकरण*
इन परिणामों से स्पष्ट है कि संवाद आधारित पुलिसिंग से न केवल कानूनी विवादों में कमी आई है, बल्कि सामाजिक संतुलन भी सुदृढ़ हुआ है।
इसके अतिरिक्त—
▪️ अनावश्यक आपराधिक प्रकरणों में कमी
▪️ महिलाओं को संवेदनशील सुनवाई एवं सुरक्षित समाधान का भरोसा
▪️ परिवारों में मानसिक तनाव एवं सामाजिक कलह में कमी
▪️ पुलिस और आमजन के मध्य विश्वास एवं सहयोग में वृद्धि
👮 सराहनीय टीम प्रयास
इस मानवीय पहल को सफल बनाने में
थाना प्रभारी *मथुरा प्रसाद गौंड*,
प्रधान आरक्षक *अवधेश खटीक (181)*,महिला प्रधान आरक्षक *रामसखी अहिरवार* एवं महिला प्रधान आरक्षक *ज्योति यादव*
की महत्वपूर्ण एवं सराहनीय भूमिका रही।
➡️ *समाज को जोड़ने की मुहिम*
“परिवार जोड़ो अभियान” केवल एक प्रशासनिक पहल नहीं, बल्कि *संवाद, सम्मान और भावनात्मक सशक्तिकरण* की सामाजिक मुहिम है।
👉इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक *श्री मनोहर सिंह मंडलोई* ने कहा—
> *“हमारा उद्देश्य केवल अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं है। हम समाज में विश्वास, संवाद और संवेदनशीलता की संस्कृति को मजबूत करना चाहते हैं। एक परिवार का सुरक्षित और खुशहाल रहना पूरे समाज को सशक्त बनाता है।”*
*प्रेस विज्ञप्ति जिला टीकमगढ़*
*दिनांक : 12 फरवरी 2026*
🔵 *जब पुलिस बनी परिवारों की संरक्षक — पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर रिश्तों को जोड़ने की अनूठी पहल”परिवार जोड़ो अभियान”*
🔵 *संवेदनशील पुलिसिंग का मानवीय स्पर्श — “परिवार जोड़ो अभियान” से फिर लौटी एक परिवार की मुस्कान*
🔵 *बिखरते घरों को मिला सहारा — “परिवार जोड़ो अभियान” से अब तक 80 परिवार हुए एकजुट*
🔵 *संवाद आधारित पहल का प्रभाव — दहेज प्रताड़ना मामलों में 54.12% की ऐतिहासिक गिरावट*
🔵 *महिला थाना की संवेदनशील काउंसलिंग से पुनः एकजुट हुआ परिवार*
पुलिस अधीक्षक जिला टीकमगढ़ *श्री मनोहर सिंह मंडलोई* के दूरदर्शी एवं संवेदनशील नेतृत्व में संचालित *“परिवार जोड़ो अभियान”* आज जिले में संवाद-आधारित पुलिसिंग का एक प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा है।
यह अभियान इस विचार पर आधारित है कि हर पारिवारिक विवाद केवल कानूनी प्रक्रिया से नहीं, बल्कि *संवाद, सहानुभूति, परामर्श और विश्वास* के माध्यम से भी सुलझाया जा सकता है।
टीकमगढ़ पुलिस कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाते हुए अपने सामाजिक दायित्व को भी समान प्राथमिकता दे रही है—ताकि टूटते रिश्तों को संभाला जा सके और बिखरते परिवारों को फिर से एकजुट किया जा सके।
🤝 *संवाद और काउंसलिंग से समाधान — पुलिस बनी रिश्तों की संरक्षक*
“परिवार जोड़ो अभियान” अनेक परिवारों के लिए *आशा की नई किरण* सिद्ध हुआ है। इस पहल के अंतर्गत पारिवारिक विवादों में कानूनी कार्रवाई से पूर्व दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर धैर्यपूर्वक संवाद, काउंसलिंग और भावनात्मक मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है।
अब तक जिले में *80 परिवार* पुनः एकजुट हो चुके हैं। यह केवल एक आँकड़ा नहीं, बल्कि उन घरों में लौटी *मुस्कान, विश्वास और आत्मीयता* की जीवंत कहानियाँ हैं।
👉 *महिला थाना टीकमगढ़ की संवेदनशील पहल — एक और परिवार टूटने से बचा*
हाल ही में महिला थाना टीकमगढ़ में प्राप्त एक पारिवारिक विवाद में दोनों पक्षों द्वारा एक-दूसरे के विरुद्ध शिकायत प्रस्तुत की गई थी।
महिला थाना द्वारा दोनों पक्षों को धैर्यपूर्वक बुलाकर विस्तार से काउंसलिंग एवं समझाइश दी गई। संवेदनशील संवाद, सहानुभूतिपूर्ण सुनवाई और संतुलित मार्गदर्शन के परिणामस्वरूप दोनों पक्ष *राज़ी-खुशी से पुनः साथ रहने* के लिए सहमत हुए।
इस प्रयास से *एक और परिवार टूटने से बच गया* — जो मानवीय पुलिसिंग का सशक्त उदाहरण है।
महिला थाना की यह परंपरा निरंतर जारी है, जहाँ कानून के साथ-साथ करुणा भी समान रूप से उपस्थित रहती है।
📊 सकारात्मक परिणाम — भरोसे की दिशा में मजबूत कदम
▪️ *80 परिवार* पुनः एकजुट
▪️ *दहेज प्रताड़ना के मामलों में 54.12% की उल्लेखनीय कमी*
▪️ वर्ष 2024 — *109 प्रकरण*
▪️ वर्ष 2025 — *50 प्रकरण*
इन परिणामों से स्पष्ट है कि संवाद आधारित पुलिसिंग से न केवल कानूनी विवादों में कमी आई है, बल्कि सामाजिक संतुलन भी सुदृढ़ हुआ है।
इसके अतिरिक्त—
▪️ अनावश्यक आपराधिक प्रकरणों में कमी
▪️ महिलाओं को संवेदनशील सुनवाई एवं सुरक्षित समाधान का भरोसा
▪️ परिवारों में मानसिक तनाव एवं सामाजिक कलह में कमी
▪️ पुलिस और आमजन के मध्य विश्वास एवं सहयोग में वृद्धि
सराहनीय टीम प्रयास
इस मानवीय पहल को सफल बनाने में
थाना प्रभारी *मथुरा प्रसाद गौंड*,
प्रधान आरक्षक *अवधेश खटीक (181)*,महिला प्रधान आरक्षक *रामसखी अहिरवार* एवं महिला प्रधान आरक्षक *ज्योति यादव*
की महत्वपूर्ण एवं सराहनीय भूमिका रही।
*समाज को जोड़ने की मुहिम*
“परिवार जोड़ो अभियान” केवल एक प्रशासनिक पहल नहीं, बल्कि *संवाद, सम्मान और भावनात्मक सशक्तिकरण* की सामाजिक मुहिम है।
इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक *श्री मनोहर सिंह मंडलोई* ने कहा—
> *“हमारा उद्देश्य केवल अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं है। हम समाज में विश्वास, संवाद और संवेदनशीलता की संस्कृति को मजबूत करना चाहते हैं। एक परिवार का सुरक्षित और खुशहाल रहना पूरे समाज को सशक्त बनाता है।”*
*टीकमगढ़ पुलिस — कानून के साथ करुणा, शक्ति के साथ संवेदना**जिला रिपोर्टर सुरेश कुमार चौधरी टीकमगढ़*
*दिनांक : 12 फरवरी 2026*
*जब पुलिस बनी परिवारों की संरक्षक — पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर रिश्तों को जोड़ने की अनूठी पहल”परिवार जोड़ो अभियान”*
*संवेदनशील पुलिसिंग का मानवीय स्पर्श — “परिवार जोड़ो अभियान” से फिर लौटी एक परिवार की मुस्कान*
*बिखरते घरों को मिला सहारा — “परिवार जोड़ो अभियान” से अब तक 80 परिवार हुए एकजुट*
*संवाद आधारित पहल का प्रभाव — दहेज प्रताड़ना मामलों में 54.12% की ऐतिहासिक गिरावट*
*महिला थाना की संवेदनशील काउंसलिंग से पुनः एकजुट हुआ परिवार*
पुलिस अधीक्षक जिला टीकमगढ़ *श्री मनोहर सिंह मंडलोई* के दूरदर्शी एवं संवेदनशील नेतृत्व में संचालित *“परिवार जोड़ो अभियान”* आज जिले में संवाद-आधारित पुलिसिंग का एक प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा है।
यह अभियान इस विचार पर आधारित है कि हर पारिवारिक विवाद केवल कानूनी प्रक्रिया से नहीं, बल्कि *संवाद, सहानुभूति, परामर्श और विश्वास* के माध्यम से भी सुलझाया जा सकता है।
टीकमगढ़ पुलिस कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाते हुए अपने सामाजिक दायित्व को भी समान प्राथमिकता दे रही है—ताकि टूटते रिश्तों को संभाला जा सके और बिखरते परिवारों को फिर से एकजुट किया जा सके।
*संवाद और काउंसलिंग से समाधान — पुलिस बनी रिश्तों की संरक्षक*
“परिवार जोड़ो अभियान” अनेक परिवारों के लिए *आशा की नई किरण* सिद्ध हुआ है। इस पहल के अंतर्गत पारिवारिक विवादों में कानूनी कार्रवाई से पूर्व दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर धैर्यपूर्वक संवाद, काउंसलिंग और भावनात्मक मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है।
अब तक जिले में *80 परिवार* पुनः एकजुट हो चुके हैं। यह केवल एक आँकड़ा नहीं, बल्कि उन घरों में लौटी *मुस्कान, विश्वास और आत्मीयता* की जीवंत कहानियाँ हैं।
👉 *महिला थाना टीकमगढ़ की संवेदनशील पहल — एक और परिवार टूटने से बचा*
हाल ही में महिला थाना टीकमगढ़ में प्राप्त एक पारिवारिक विवाद में दोनों पक्षों द्वारा एक-दूसरे के विरुद्ध शिकायत प्रस्तुत की गई थी।
महिला थाना द्वारा दोनों पक्षों को धैर्यपूर्वक बुलाकर विस्तार से काउंसलिंग एवं समझाइश दी गई। संवेदनशील संवाद, सहानुभूतिपूर्ण सुनवाई और संतुलित मार्गदर्शन के परिणामस्वरूप दोनों पक्ष *राज़ी-खुशी से पुनः साथ रहने* के लिए सहमत हुए।
इस प्रयास से *एक और परिवार टूटने से बच गया* — जो मानवीय पुलिसिंग का सशक्त उदाहरण है।
महिला थाना की यह परंपरा निरंतर जारी है, जहाँ कानून के साथ-साथ करुणा भी समान रूप से उपस्थित रहती है।
📊 सकारात्मक परिणाम — भरोसे की दिशा में मजबूत कदम
▪️ *80 परिवार* पुनः एकजुट
▪️ *दहेज प्रताड़ना के मामलों में 54.12% की उल्लेखनीय कमी*
▪️ वर्ष 2024 — *109 प्रकरण*
▪️ वर्ष 2025 — *50 प्रकरण*
इन परिणामों से स्पष्ट है कि संवाद आधारित पुलिसिंग से न केवल कानूनी विवादों में कमी आई है, बल्कि सामाजिक संतुलन भी सुदृढ़ हुआ है।
इसके अतिरिक्त—
▪️ अनावश्यक आपराधिक प्रकरणों में कमी
▪️ महिलाओं को संवेदनशील सुनवाई एवं सुरक्षित समाधान का भरोसा
▪️ परिवारों में मानसिक तनाव एवं सामाजिक कलह में कमी
▪️ पुलिस और आमजन के मध्य विश्वास एवं सहयोग में वृद्धि
👮 सराहनीय टीम प्रयास
इस मानवीय पहल को सफल बनाने में
थाना प्रभारी *मथुरा प्रसाद गौंड*,
प्रधान आरक्षक *अवधेश खटीक (181)*,महिला प्रधान आरक्षक *रामसखी अहिरवार* एवं महिला प्रधान आरक्षक *ज्योति यादव*
की महत्वपूर्ण एवं सराहनीय भूमिका रही।
➡️ *समाज को जोड़ने की मुहिम*
“परिवार जोड़ो अभियान” केवल एक प्रशासनिक पहल नहीं, बल्कि *संवाद, सम्मान और भावनात्मक सशक्तिकरण* की सामाजिक मुहिम है।
👉इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक *श्री मनोहर सिंह मंडलोई* ने कहा—
> *“हमारा उद्देश्य केवल अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं है। हम समाज में विश्वास, संवाद और संवेदनशीलता की संस्कृति को मजबूत करना चाहते हैं। एक परिवार का सुरक्षित और खुशहाल रहना पूरे समाज को सशक्त बनाता है।”*
*प्रेस विज्ञप्ति जिला टीकमगढ़*
*दिनांक : 12 फरवरी 2026*
🔵 *जब पुलिस बनी परिवारों की संरक्षक — पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर रिश्तों को जोड़ने की अनूठी पहल”परिवार जोड़ो अभियान”*
🔵 *संवेदनशील पुलिसिंग का मानवीय स्पर्श — “परिवार जोड़ो अभियान” से फिर लौटी एक परिवार की मुस्कान*
🔵 *बिखरते घरों को मिला सहारा — “परिवार जोड़ो अभियान” से अब तक 80 परिवार हुए एकजुट*
🔵 *संवाद आधारित पहल का प्रभाव — दहेज प्रताड़ना मामलों में 54.12% की ऐतिहासिक गिरावट*
🔵 *महिला थाना की संवेदनशील काउंसलिंग से पुनः एकजुट हुआ परिवार*
पुलिस अधीक्षक जिला टीकमगढ़ *श्री मनोहर सिंह मंडलोई* के दूरदर्शी एवं संवेदनशील नेतृत्व में संचालित *“परिवार जोड़ो अभियान”* आज जिले में संवाद-आधारित पुलिसिंग का एक प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा है।
यह अभियान इस विचार पर आधारित है कि हर पारिवारिक विवाद केवल कानूनी प्रक्रिया से नहीं, बल्कि *संवाद, सहानुभूति, परामर्श और विश्वास* के माध्यम से भी सुलझाया जा सकता है।
टीकमगढ़ पुलिस कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाते हुए अपने सामाजिक दायित्व को भी समान प्राथमिकता दे रही है—ताकि टूटते रिश्तों को संभाला जा सके और बिखरते परिवारों को फिर से एकजुट किया जा सके।
🤝 *संवाद और काउंसलिंग से समाधान — पुलिस बनी रिश्तों की संरक्षक*
“परिवार जोड़ो अभियान” अनेक परिवारों के लिए *आशा की नई किरण* सिद्ध हुआ है। इस पहल के अंतर्गत पारिवारिक विवादों में कानूनी कार्रवाई से पूर्व दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर धैर्यपूर्वक संवाद, काउंसलिंग और भावनात्मक मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है।
अब तक जिले में *80 परिवार* पुनः एकजुट हो चुके हैं। यह केवल एक आँकड़ा नहीं, बल्कि उन घरों में लौटी *मुस्कान, विश्वास और आत्मीयता* की जीवंत कहानियाँ हैं।
👉 *महिला थाना टीकमगढ़ की संवेदनशील पहल — एक और परिवार टूटने से बचा*
हाल ही में महिला थाना टीकमगढ़ में प्राप्त एक पारिवारिक विवाद में दोनों पक्षों द्वारा एक-दूसरे के विरुद्ध शिकायत प्रस्तुत की गई थी।
महिला थाना द्वारा दोनों पक्षों को धैर्यपूर्वक बुलाकर विस्तार से काउंसलिंग एवं समझाइश दी गई। संवेदनशील संवाद, सहानुभूतिपूर्ण सुनवाई और संतुलित मार्गदर्शन के परिणामस्वरूप दोनों पक्ष *राज़ी-खुशी से पुनः साथ रहने* के लिए सहमत हुए।
इस प्रयास से *एक और परिवार टूटने से बच गया* — जो मानवीय पुलिसिंग का सशक्त उदाहरण है।
महिला थाना की यह परंपरा निरंतर जारी है, जहाँ कानून के साथ-साथ करुणा भी समान रूप से उपस्थित रहती है।
📊 सकारात्मक परिणाम — भरोसे की दिशा में मजबूत कदम
▪️ *80 परिवार* पुनः एकजुट
▪️ *दहेज प्रताड़ना के मामलों में 54.12% की उल्लेखनीय कमी*
▪️ वर्ष 2024 — *109 प्रकरण*
▪️ वर्ष 2025 — *50 प्रकरण*
इन परिणामों से स्पष्ट है कि संवाद आधारित पुलिसिंग से न केवल कानूनी विवादों में कमी आई है, बल्कि सामाजिक संतुलन भी सुदृढ़ हुआ है।
इसके अतिरिक्त—
▪️ अनावश्यक आपराधिक प्रकरणों में कमी
▪️ महिलाओं को संवेदनशील सुनवाई एवं सुरक्षित समाधान का भरोसा
▪️ परिवारों में मानसिक तनाव एवं सामाजिक कलह में कमी
▪️ पुलिस और आमजन के मध्य विश्वास एवं सहयोग में वृद्धि
सराहनीय टीम प्रयास
इस मानवीय पहल को सफल बनाने में
थाना प्रभारी *मथुरा प्रसाद गौंड*,
प्रधान आरक्षक *अवधेश खटीक (181)*,महिला प्रधान आरक्षक *रामसखी अहिरवार* एवं महिला प्रधान आरक्षक *ज्योति यादव*
की महत्वपूर्ण एवं सराहनीय भूमिका रही।
*समाज को जोड़ने की मुहिम*
“परिवार जोड़ो अभियान” केवल एक प्रशासनिक पहल नहीं, बल्कि *संवाद, सम्मान और भावनात्मक सशक्तिकरण* की सामाजिक मुहिम है।
इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक *श्री मनोहर सिंह मंडलोई* ने कहा—
> *“हमारा उद्देश्य केवल अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं है। हम समाज में विश्वास, संवाद और संवेदनशीलता की संस्कृति को मजबूत करना चाहते हैं। एक परिवार का सुरक्षित और खुशहाल रहना पूरे समाज को सशक्त बनाता है।”*
*टीकमगढ़ पुलिस — कानून के साथ करुणा, शक्ति के साथ संवेदना*

