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लखनऊ उत्तर प्रदेश। यूपी बार काउंसिल की रूपया 14000,फीस पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया _नये वकीलों से सर्टिफिकेट आफ प्रैक्टिस के नाम पर अधिक वसूली जवाब मांगा।

“UP बार काउंसिल की ₹14,000 फीस पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया — नए वकीलों से ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस’ के नाम पर अधिक वसूली, जवाब मांगा”

रिपोर्ट राजेश कुमार यादव
लखनऊ उत्तर प्रदेश

घटना का विस्तृत विवरण

संदर्भ और सुप्रीम कोर्ट का रुख

सुप्रीम कोर्ट ने 25 अगस्त 2025 को उत्तर प्रदेश बार काउंसिल (UP Bar Council) को नोटिस जारी किया है क्योंकि वह नए वकीलों से ₹14,000 सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस (Certificate of Practice) के नाम पर वसूल रही है—जो कि सुप्रीम कोर्ट के Gaurav Kumar बनाम Union of India (2024) निर्णय का उल्लंघन प्रतीत होता है।
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सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही स्पष्ट किया था कि राज्य बार काउंसिल केवल वही फीस वसूल सकती है जो Advocates Act, 1961 की धारा 24(1)(f) में निर्धारित है—यानि ₹750 (सामान्य वर्ग) और ₹125 (SC/ST वर्ग) से अधिक नहीं।
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आरोप और न्यायालय की प्रतिक्रिया

याचिकाकर्ता दीपक यादव ने अदालत को बताया कि之前 UP Bar Council ₹16,500 लेती थी, जो अब ₹14,000 में बदल गई है, और यह अधिवक्ताओं द्वारा अभ्यास प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए एक अतिरिक्त बोझ बन गया है।
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सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को prima facie—यानि प्रारंभिक तौर पर—अपने पिछले निर्णय का उल्लंघन माना है और UP Bar Council से अस्पष्टता दूर करने के लिए जवाब मांगा है।
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सारांश तालिका

पहलू विवरण

मामले का मुख्य मुद्दा नए वकीलों से सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस नाम पर ₹14,000 फ़ीस
सरकार/काउंसिल की पूरानी फीस पहले ₹16,500, अब ₹14,000 वसूला जा रहा है
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश Section 24 के तहत ही अधिकतम ₹750 / ₹125 फीस वैध
अभी की स्थिति UP Bar Council को नोटिस जारी — जवाब माँगा गया
आगे की सुनवाई की संभावना याचिका की समीक्षा, जवाब आने पर अगली कार्रवाई संभव

 

निष्कर्ष

यह कदम सुप्रीम कोर्ट की इस सिद्धांत पर आधारित है कि नौजवान वकीलों के प्रवेश को वित्तीय बाधा से बचाया जाए, और फीस केवल विधिवत चार्ज हो और संवैधानिक सीमाओं के भीतर ही रहे। UP Bar Council से जवाब आने के बाद ही अगले कदमों का निर्णय होगा—जैसे फीस में कटौती, आदेश बदला जा सकता है या न्यायालय हस्तक्षेप कर सकेगा।

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