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प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना ने रेहड़ी पटरी विक्रेताओं को आत्मनिर्भरता वित्तीय सशक्तिकरण और सम्मानजनक आजीविका का नया आधार प्रदान किया डॉ वीरेंद्र कुमार

प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना ने रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को आत्मनिर्भरता, वित्तीय सशक्तिकरण और सम्मानजनक आजीविका का नया आधार प्रदान किया : डॉ. वीरेंद्र कुमार।*

 

टीकमगढ़।केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में प्रारंभ की गई प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना देश के लाखों रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण का एक सफल एवं प्रेरणादायी मॉडल बनकर उभरी है। कोविड-19 महामारी के दौरान जब छोटे विक्रेताओं की आजीविका गंभीर संकट में पड़ गई थी, तब 1 जून 2020 को आरंभ की गई इस योजना ने बिना किसी गारंटी के कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराकर उन्हें पुनः आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्रदान किया।

डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि आज का दिन देश के लिए विशेष महत्व का है, क्योंकि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में सर्वाधिक अवधि तक निरंतर देश की सेवा करने वाले प्रधानमंत्री बने हैं। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर यह स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि गरीब कल्याण, सामाजिक न्याय, वित्तीय समावेशन और आत्मनिर्भरता को केंद्र में रखकर संचालित योजनाओं ने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुँचाया है।

उन्होंने कहा कि पीएम स्वनिधि योजना केवल एक ऋण योजना नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भरता, वित्तीय समावेशन, डिजिटल सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय का व्यापक अभियान है। योजना के अंतर्गत अब तक 75.5 लाख से अधिक स्ट्रीट वेंडरों को लाभान्वित किया जा चुका है तथा 1.15 करोड़ से अधिक ऋण वितरित किए गए हैं। वितरित ऋणों का कुल मूल्य 17,800 करोड़ रुपये से अधिक है।

मंत्री महोदय ने कहा कि इस योजना की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक यह है कि इसने समाज के गरीब एवं वंचित वर्गों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा है। लगभग 95 प्रतिशत लाभार्थियों ने अपने जीवन में पहली बार संस्थागत ऋण प्राप्त किया है, जबकि लगभग 30 प्रतिशत लाभार्थी बाद में अन्य बैंकिंग एवं वित्तीय संस्थानों से भी ऋण प्राप्त करने में सफल हुए हैं। यह उनकी बढ़ती वित्तीय साख और विश्वसनीयता का प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी की विकास दृष्टि का मूल उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुँचाना है। इसी सोच के अनुरूप बीते वर्षों में करोड़ों नागरिकों को बैंकिंग सेवाओं, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा तथा आर्थिक अवसरों से जोड़ा गया है। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना इसी परिवर्तनकारी सोच का एक सशक्त उदाहरण है, जिसने पहली बार लाखों छोटे विक्रेताओं को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था का हिस्सा बनाया है।

मंत्री महोदय ने बताया कि योजना ने डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी उल्लेखनीय योगदान दिया है। वर्तमान में 55 लाख से अधिक लाभार्थी डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं। इन लाभार्थियों द्वारा 841 करोड़ से अधिक डिजिटल लेन-देन किए गए हैं, जिनका कुल मूल्य लगभग 8.96 लाख करोड़ रुपये है। डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने हेतु सरकार द्वारा ब्याज सब्सिडी और कैशबैक के रूप में लगभग 800 करोड़ रुपये की सहायता भी प्रदान की गई है।

उन्होंने कहा कि योजना का सामाजिक प्रभाव भी अत्यंत व्यापक है। लगभग 46 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं हैं, जबकि लगभग 70 प्रतिशत लाभार्थी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा अन्य वंचित समुदायों से संबंधित हैं। यह योजना सामाजिक न्याय, समावेशी विकास और आर्थिक सशक्तिकरण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को सशक्त रूप से अभिव्यक्त करती है।

डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण को विकास प्रक्रिया का प्रमुख आधार बनाया गया है। इसी दिशा में पीएम स्वनिधि और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना जैसी पहलों ने लाखों महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों और उद्यमिता से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उन्होंने कहा कि पीएम स्वनिधि योजना ने लाखों स्ट्रीट वेंडरों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाते हुए उन्हें स्वरोजगार, वित्तीय आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक आजीविका का नया अवसर प्रदान किया है। बड़ी संख्या में लाभार्थियों ने अपने व्यवसाय को पुनर्जीवित किया, उसका विस्तार किया तथा डिजिटल भुगतान जैसी आधुनिक व्यवस्थाओं को अपनाकर अपनी आय और ग्राहक आधार में उल्लेखनीय वृद्धि की है।

मंत्री महोदय ने कहा कि यह योजना वास्तव में “विक्रेता से उद्यमी”, “गुजारे से आत्मनिर्भरता” और “अनौपचारिक अर्थव्यवस्था से वित्तीय समावेशन” की परिवर्तनकारी यात्रा का प्रतीक बन चुकी है।

उन्होंने यह भी कहा कि सूक्ष्म उद्यमिता को बढ़ावा देने में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। योजना के अंतर्गत अब तक 57.79 करोड़ से अधिक ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं तथा 40.07 लाख करोड़ रुपये से अधिक का ऋण वितरित किया गया है। विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि इन ऋणों का लगभग 68 से 70 प्रतिशत लाभ महिला उद्यमियों को प्राप्त हुआ है, जो महिला सशक्तिकरण और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना जैसी पहलें विकसित भारत के निर्माण, आर्थिक समावेशन और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुँचाने के राष्ट्रीय संकल्प को और अधिक सशक्त कर रही हैं। इन योजनाओं ने लाखों परिवारों को आर्थिक सुरक्षा, सम्मानजनक आजीविका और आत्मनिर्भरता का नया मार्ग प्रदान किया है।

मंत्री महोदय ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सामाजिक न्याय, वित्तीय समावेशन, महिला सशक्तिकरण, उद्यमिता विकास और गरीब कल्याण की यह यात्रा आगे भी निरंतर जारी रहेगी तथा विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

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