
रिश्वत प्रकरण में बड़ा फैसला: चौकी प्रभारी शिवाकर मिश्रा की जमानत याचिका खारिज
लखनऊ उत्तरप्रदेश से राजेश कुमार यादव की खास रिपोर्ट 
वाराणसी की विशेष भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय ने एंटी करप्शन मामले में आरोपी चौकी प्रभारी शिवाकर मिश्रा की पहली जमानत अर्जी खारिज कर दी है। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), विशेष न्यायालय संख्या-1, वाराणसी ने प्रथम जमानत प्रार्थना पत्र संख्या-474/2026 को निरस्त करते हुए कहा कि मामले की प्रकृति गंभीर है और जमानत का पर्याप्त आधार नहीं बनता।
क्या है मामला?
मुकदमा अपराध संख्या-01/2026, थाना एंटी करप्शन, वाराणसी में धारा 7/12 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) के तहत दर्ज है।
अभियोजन के अनुसार, शिवाकर मिश्रा, जो उस समय चौकी प्रभारी विद्यापीठ (थाना सिगरा) के पद पर तैनात थे, ने एक मुकदमे को समाप्त करने के एवज में 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी।
शिकायतकर्ता प्रहलाद गुप्ता ने भ्रष्टाचार निवारण संगठन से शिकायत की। आरोप है कि 28 जनवरी 2026 को ट्रैप टीम ने 20 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए सहअभियुक्त आरक्षी गौरव कुमार द्विवेदी को रंगे हाथ गिरफ्तार किया। अभियोजन का दावा है कि यह रकम शिवाकर मिश्रा के कहने पर ली जा रही थी। दोनों आरोपियों को मौके से गिरफ्तार किया गया।
बचाव पक्ष के तर्क
बचाव पक्ष की ओर से कहा गया कि:
* आरोपी निर्दोष हैं और उन्हें साजिश के तहत फंसाया गया है।
* उनके पास से कोई रिश्वत की रकम बरामद नहीं हुई।
* हाथ धुलवाने पर रंग गुलाबी नहीं हुआ, जिससे रिश्वत लेने की पुष्टि नहीं होती।
* प्री-ट्रैप कार्यवाही में शिकायतकर्ता का शपथपत्र नहीं लिया गया, जिससे पूरी कार्यवाही दूषित है।
* विवेचना के दौरान आरोपी ने किसी दबाव में काम नहीं किया।
बचाव पक्ष ने उच्चतम न्यायालय के एक निर्णय का हवाला भी दिया।
अभियोजन का पक्ष
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि:
* यह आर्थिक अपराध है और लोक सेवक द्वारा पद का दुरुपयोग किया गया।
* सहअभियुक्त को ट्रैप टीम ने रंगे हाथ पकड़ा है।
* विवेचना अभी प्रचलित है, इसलिए जमानत देना उचित नहीं होगा।
न्यायालय की टिप्पणी
न्यायालय ने कहा कि मामला एक लोक सेवक द्वारा कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा है, जो गंभीर श्रेणी का अपराध है। प्रथम सूचना रिपोर्ट में आरोपी नामजद हैं और विवेचना जारी है।
अदालत ने माना कि प्रस्तुत तथ्यों व परिस्थितियों में जमानत का पर्याप्त आधार नहीं है।
आदेश
प्रथम जमानत प्रार्थना पत्र संख्या-474/2026 निरस्त किया जाता है।
शिवाकर मिश्रा फिलहाल न्यायिक अभिरक्षा में रहेंगे।

