

गोण्डा – पंचयात राज विभाग ने अक्षय तृतीया के उपलक्ष्य पर बाल विवाह को रोकने का शंकल्प लिया और गैरसरकारी संगठन अपराजिता सामाजिक समिति का भी प्रयास लिया जायेगा,जबकि पंचायत राज विभाग ने ग्राम प्रधान,पंचायत प्रतिनिधि और वीएलसीपीसी को जनपद के सभी ग्राम पंचायत में बाल विवाह रोकने के लिए दिया आदेशित किया गया,अगर अमल नहीं किया गया |अपने ग्राम सभाओ में बाल विवाह के लिए जवाबदेह बनेंगे,और जनपद पुलिस अधीक्षक थाना और चौकी को निर्देशित किया,बाल विवाह के मामलों मे शक्ति से कार्यवाही हो,जिलाधिकारी के निर्देशित किया हैं की प्रोबेशन विभाग ने सभी बाल संरक्षण विभाग को पत्र भेजा गया,की बाल विवाह जैसे मुद्दे में शक्ति से कार्यवाही की जाए,और बाल विवाह की जानकारी मिलते ही तत्काल कार्यवाही करना शुनिश्चित करें,उत्तर प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग (यूपीसीपीसीआर) ने एक अधिसूचना जारी कर पंचायती राज विभाग को बाल विवाह को रोकने की जिम्मेदारी सौपी हैं और ग्राम प्रधानों और ग्राम स्तरीय बाल संरक्षण समितियों वीएलसीपीसी को सौंपी है।अनिवार्य रूप से विवाह रजिस्टर में अंकित होना चाहिए राज्य सरकार की यह पहल जो हर पंचायत को बाल विवाह मुक्त करना हैं,स्वागत करते हुए बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के गठबंधन सहयोगी अपराजिता सामाजिक समिति ने कहा कि वे इस पहल की सफलता सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार के प्रयासों में हरसंभव सहयोग करेंगे। बाल विवाह मुक्त भारत अभियान 2030 तक इस सामाजिक अपराध के खात्मे के लिए पूरे देश में काम कर रहे 161 गैरसरकारी संगठनों का गठबंधन है।अधिकारियों को सचेत करते हुए यूपीसीपीसीआर ने कहा कि साल के इस समय के दौरान हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों में बाल विवाह में वृद्धि देखी जाती है।यदि किसी गांव या वार्ड में कोई बाल विवाह होता है तो जिम्मेदारी संबंधित वार्ड सदस्य और पंचायत सदस्यों की होगी।यूपीसीपीसीआर के पत्र में यह भी कहा गया है कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि किसी भी गांव में कोई बाल विवाह न हो,क्षेत्र की पंचायत और पार्षद को एक विवाह रजिस्टर का रखरखाव अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करना होगा। साथ ही, वे पंडितों और मौलवियों जैसे धार्मिक गुरुओं को भी निर्देश दें कि वे शादी से पहले दूल्हा और दुल्हन की उम्र की पुष्टि करें।इस बीच बाल विवाह के खात्मे के लिए उत्तर प्रदेश गोण्डा में जमीनी स्तर पर काम कर रहे गैरसरकारी संगठन अपराजिता सामाजिक समिति ने राज्य सरकार की इस पहल को सार्थक बताया,संगठन अपराजिता सामाजिक समिति के निदेशिका किरन बैस ने कहा अक्षय तृतीया पर बाल विवाह के लिहाज से संवेदनशील समय है।राज्य सरकार ने इस सामाजिक बुराई के खिलाफ जो दृढ़ रुख अपनाया है,उससे हम आश्वस्त हैं कि हम राज्य से इस बुराई को उखाड़ फेंकने के अपने लक्ष्य में सफल होंगे।

