
*जिसके निर्देश पर पुलिस सुरेन्द्र साहनी को नदी में लाश ढूंढने ले गई उसके विरुद्ध दर्ज हो गया
हत्या का मुकदमा
*संवेदनहीनता की हद कर दिया बरहज पुलिस और प्रशासन ने
लखनऊ उत्तरप्रदेश से राजेश कुमार यादव की खास रिपोर्ट
बरहज /देवरिया प्रशासन की लापरवाही से हुई मछुआरे सुरेन्द्र साहनी की सरयू नदी में डूबने से मौत
*साहनी के परिजनों को मिले 1करोड़ रुपए का मुआवजा और सरकारी नौकरी
*बरहज में एक बार पुनः स्थानीय पुलिस की मनमानी और संवेदनहीनता से निषाद राज के वंशज सुरेन्द्र साहनी को असमय जान गवानी पढ़ीं जिन लोगों ने सुरेन्द्र को दबाव बनाकर बिना सुरक्षा उपकरण के लाश ढूंढने नदी में उतारा वही लोग उसके मौत के जिम्मेदार है उनके विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी हो मृतक के परिजनों को मुआवजा और सरकारी नौकरी मिले अन्यथा होगा जोरदार आंदोलन
तीन दिन पूर्व नदी पार परसिया देवार निवासी एक युवक की पीपा पुल से रेलिंग नहीं होने के अभाव घर जाते समय नदी में गिरकर डूब गया, जिसकी खोजबीन जारी थी। डूबे युवक की आपदा प्रबंधन टीम खोजबीन की बावजूद युवक की तलाश नहीं हो सकी। आज आनन फ़ानन में कुछ पुलिस कर्मी
गौरा निवासी सुरेंद्र साहनी पुत्र मोहन निषाद को उसके घर से बुलाकर नदी गई और डूबे युवक की खोजबीन कराने लगी।
खोजबीन के दौरान ही सुरेन्द्र भी नदी में आचनक गायब हो गया और डूब गया। नदी किनारे मौजूद मछुआरों ने सुरेन्द्र की काफी मशक्कत के तलाश की, लेकिन सुरेंद्र की नदी में डूबने से मौत हो गई।
….अब सवाल ये की जब आपदा प्रबंधन टीम पूर्व में डूबे युवक की तीन दिनों में तलाश नहीं कर पाई तो इस अप्रशिक्षित सुरेन्द्र को उस डूबे युवक को खोजने में क्यों लगाया गया ? आखिर प्रशासन ने सुरेन्द्र को सुरक्षा उपकरण क्यों नहीं उपलब्ध कराया ? स्थानीय प्रशासन की लापरवाही के चलते सुरेन्द्र की मौत हुई है। डूबे सुरेंद्र की पत्नी सहित तीन नाबालिक दो लड़के और एक लड़की है.. आखिर इनका भरण पोषण कैसे होगा ? इसकी जिम्मेवारी कौन उठाएगा??
ऐसे में सुरेन्द्र साहनी की मौत के जिम्मेवार स्थानीय प्रशासन के लोगों पर मुकदमा दर्ज किया जाना और पीड़ित परिजनों को 1करोड़ रुपए और सरकारी नौकरी दिया जाएं।

