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एंटी पेपर लीक कानून से युवाओं को मिलेगा न्याय

देशभर में नीट पेपर लीक और यूजीसी नेट परीक्षा में धांधली को लेकर हंगामा मचा हुआ है। ऐसे में सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए, आने वाले परीक्षाओं में पेपर लीक को रोकने के लिए कड़ा कानून लागू किया है। केंद्र सरकार की ओर से लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 अधिसूचित की गई है। इस एंटी पेपर लीक कानून का मकसद प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक और नकल को रोकना है, क्योंकि लगातार परिश्रम कर तैयारी करने वाले युवा जैस-तैसे सफर करके परीक्षा देने पहुंचते हैं। लेकिन, पेपर लीक माफिया का शिकार हो जाते हैं। इससे न केवल उनका मनोबल टूटता है, अपितु तमाम संसाधन एवं ऊर्जा जाया हो जाती है। अधिवक्ताओं ने इस कानून को लेकर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

बोले अधिवक्ता
इस कानून के लागू होने से हर स्तर पर सरकारी एजेंसी की जवाबदेही के उच्च मानक तय किए जाएंगे। इस कानून के तहत दोषी पाए जाने पर आरोपी की संपत्ति कुर्क की जा सकती है। जांच एजेंसी को यह ताकत दी गई है, जिससे हर आरोपी के खिलाफ नकेल कसी जा सके।

रमेश मणि त्रिपाठी, अधिवक्ता
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इस कानून का एक अहम पहलू यह भी है कि यह कंप्यूटर पर होने वाली परीक्षाओं की सुरक्षा की भी बात करता है। इस कानून में हाई लेवल नेशनल टेक्निकल कमेटी बनाने की बात की गई है। इसके अलावा परीक्षा के दौरान इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और फुलप्रूफ आईटी सिक्योरिटी सिस्टम रखे जाने की भी बात है।

शदाब अहमद, अधिवक्ता
इस अधिनियम का उद्देश्य यूपीएससी, एसएससी, रेलवे, बैंकिंग भर्ती परीक्षाओं और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) आदि की ओर से आयोजित सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों का प्रयोग रोकना है। इस नए कानून के तहत धोखाधड़ी रोकने के लिए न्यूनतम सात वर्ष के कारावास का प्रावधान है।

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