
*भीषण गर्मी में स्कूली बच्चों से बस को लगवाया धक्का!*
*सांदीपनि विद्यालय मानपुर में बच्चों के आवागमन के लिए संचालित बस बस स्टैंड पर हुई खराब; मंगलानी ट्रैवल्स की बसों की फिटनेस पर उठे सवाल*
- *राजा दिवाकर मिश्रा*
मानपुर, उमरिया। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा सांदीपनि विद्यालयों में बच्चों के आवागमन के लिए बसों का संचालन कराया जा रहा है। इसी व्यवस्था के तहत सांदीपनि विद्यालय मानपुर में बच्चों के परिवहन का कार्य मंगलानी ट्रैवल्स को मिला है। शनिवार सुबह करीब 10:30 बजे मानपुर बस स्टैंड पर इसी व्यवस्था में संचालित एक बस अचानक खराब हो गई। भीषण गर्मी में बस में सवार स्कूली बच्चों को नीचे उतरकर बस को धक्का लगाना पड़ा।
घटना सामने आने के बाद बच्चों के सुरक्षित परिवहन और बसों की तकनीकी स्थिति को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
*पुरानी बसों के संचालन का आरोप*
अभिभावकों का कहना है कि बस खराब होने की यह पहली घटना नहीं है। बच्चों के परिवहन में लगी बसों के बार-बार खराब होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। आरोप है कि पुरानी बसों को डेंट-पेंट कराकर बच्चों के परिवहन में लगाया जा रहा है।
हालांकि, संबंधित बस की वास्तविक उम्र, तकनीकी स्थिति और फिटनेस की पुष्टि अधिकृत जांच के बाद ही हो सकेगी। इसलिए अब आरटीओ की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
*बच्चों की सुरक्षा पर सवाल*
स्कूली बस का बीच रास्ते में खराब होना तकनीकी समस्या हो सकती है, लेकिन भीषण गर्मी में बच्चों का खुद सड़क पर उतरकर बस को धक्का लगाना परिवहन व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
क्या बच्चों के परिवहन में लगी बसों की नियमित तकनीकी जांच होती है? क्या उनके फिटनेस प्रमाण-पत्र वैध हैं? क्या नियमित सर्विसिंग और सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है? इन सवालों का जवाब जांच के बाद सामने आना चाहिए।
*जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा—आरटीओ से कराएंगे निरीक्षण*
मामले में जिला शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र सिंह ने कहा, “आपके द्वारा मामला संज्ञान में लाया गया है। हम आरटीओ से बस का निरीक्षण कर लेंगे।”
अब आरटीओ के निरीक्षण से यह स्पष्ट होगा कि बस निर्धारित फिटनेस एवं सुरक्षा मानकों के अनुरूप है या नहीं।
*सवाल बस खराब होने से आगे का*
मामला केवल एक बस के खराब होने तक सीमित नहीं है। यदि बच्चों के परिवहन के लिए संचालित बसों की तकनीकी स्थिति कमजोर पाई जाती है तो यह व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर सवाल होगा। वहीं यदि बस फिटनेस मानकों पर खरी उतरती है तो बार-बार खराब होने की शिकायतों के कारणों की जांच भी जरूरी होगी।
बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। अब निगाह आरटीओ के निरीक्षण और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर है।


