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शीर्षक -भ्रष्टाचारी है तू डॉ एच सी विपिन कुमार जैन “विख्यात”

शीर्षक -भ्रष्टाचारी है तू

डॉ एच सी विपिन कुमार जैन “विख्यात”

 

झूठ बोलने में एक से एक बाप हैं,”विख्यात”।

उन्ही में से एक,

दोहरी मानसिकता जीने वाले आप हैं,अफसर साहब

झूठ बोलना जरूरी है,

यह आपकी मजबूरी है।

तेरी जान को सौ झमेले हैं,

भ्रष्टाचारियों के जीवन में तो मेले ही मेले हैं ।

झूठ भी बहुत ईमानदारी से बोला जाता है,

तैयारी करके सुबह शाम रट्टा लगाया जाता है।

तुझे सच सुनना पसंद है, झूठ नहीं,

मगर तू बोलता झूठ है,सच नहीं।

तू अपने झूठ से कब तक सबको , बहकायेगा।

एक दिन तेरा ही किया, तेरे सामने आएगा।

अपनों को खोकर जिंदा तो है, तू

ढो रहा है,

अपनी लाश को अपने कन्धों पर।

क्योंकि भ्रष्टाचारियों है तू।

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