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महिलाओं की प्रधानी चला रहे पुरुष

प्रधान पति / प्रधान पुत्र ही सारे कार्य करते हैं महिला प्रधान एक रबर स्टैंप ही रह गई है :हाई कोर्ट

गांव के सभी निर्णय प्रधान पति/प्रधान पुत्र आदि लेते हैं और चुनाव हुआ जनप्रतिनिधि मूक दर्शक बना हुआ है : हाई कोर्ट

जबकि महिलाओं के लिये 33%आरक्षण निर्धारित

फिर क्यों हो रहा महिला अधिकारों का हनन?

महिला प्रधान ब्लाक कार्यालय पर आती ही नहीं तो तत्काल जरूरत पड़ने पर कागजों पर कौन करता है हस्ताक्षर यह जांच का विषय है ?

इस प्रकरण पर उच्चाधिकारी नहीं दे रहे ध्यान ?

हरदोई शाहाबाद टोडरपुर ब्लाक क्षेत्र में 71 ग्राम पंचायत है यहां पर 32 ग्राम पंचायतों में तो सिर्फ महिलाएं ही ग्राम प्रधान हैं ।यहां अधिकतर प्रधानी महिलाओं की जगह इनके घर के सदस्य चला रहे हैं । ग्राम पंचायतों में चुनी गई महिला प्रधान महिला सचिवालय तक में बैठकर किसी भी आम जन की शिकायत सुनते हुए भी नहीं दिखती है वह चाहे ब्लॉक स्तर में कोई कार्य हो या सचिवालय पर जन समस्याओं को सुनते सुनते भी उनके घर के सदस्य पति देवर पुत्र ही देखे जाते हैं क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि पुरुषों से अधिक भरोसेमंद महिला में होती हैं। इसलिये लोगों ने महिलाओं को अधिक संख्या में ग्राम प्रधान चुना।

क्या है शासनादेश ?

महिला ग्राम प्रधान के स्थान पर अगर कोई दूसरा प्रधानी करता है तो प्रधान के कार्य पर रोक लगा दी जाएगी ? और उसके वित्तीय समेत सभी अधिकार सीज कर दिये जायेंगे । इसके लिए सभी सचिवों को निर्देश दिया गया है कि महिला प्रधान के कार्य में अगर कोई हस्तक्षेप करता है तो वह उसे वह स्वयं रोके और उसकी रिपोर्ट डीपीआरओ को भेजें ।
ब्लॉक प्रशासन क्यों नहीं दे रहा ध्यान ?

इन ग्राम पंचायतों में है महिला प्रधान करावां परसई गौरिया कपूरपुर कुसुमा फतेपुर गयंद बूढ़नपुर रैगवां हैदरपुर पिढ़मा बक्सीपुर कोठिला सरैया सिकंदरपुर बाजार उमरौली पीला महुआ कूंची खेड़ा चेना लोना कंधरापुर भोगीपुरग्रंट जमुरा लोनी कठमा चठिया धनवार औडे़री डिघिया कैमी अंयारी हुमायूंपुर तिउर चौगावां नेवादा चठिया जसरथपुर भदेउना धनवार ।
इसी तरह शाहाबाद विकास खंड में कुल प्रधान 83 महिला प्रधान 32 हैं उपरोक्त की तरह यहां शाहाबाद में भी महिला प्रधानो के साथ हो रहा है अन्याय ।यही स्थित समस्त जनपद में बनी हुई है परंतु जिले केआला अधिकारी मौन ?

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