*श्रीमद्भागवत कथा में कृष्ण जन्म सुनकर मंत्रमुग्ध हुए श्रोतागण*
दबोह-
भागवत कथा एक ऐसी कथा है जिसे ग्रहण करने मात्र से ही मन को शांति मिलती है।भागवत कथा सुनने से अहंकार का नाश होता है।भागवत कथा के आयोजन से श्रोताओं में खुशी का माहौल है।यह बात कथावाचक परम् पूज्य पंडित रमाकांत महाराज जी ने दबोह क्षेत्र के सुप्रसिद्ध सिद्ध धार्मिक स्थल मां रणकौशला देवी मंदिर परिसर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कही।आगे उन्होंने कृष्ण जन्म की कथा सुनाई वसुदेव देवकी के बंदी गृह में भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ जिसके बाद बसु देव जी ने बालक को लेकर गोकुलधाम नंद बाबा यशोदा के पास छोड़ आए और वहां कृष्ण जन्म का उत्सव मनाया गया।इस दौरान सभी भक्तों ने भागवत की आरती उतारी और प्रसाद का वितरण किया गया।भगवान श्रीकृष्ण के वेश में नन्हें बालक के दर्शन करने के लिए लोग लालायित नजर आ रहे थे।कथा वाचक ने कहा कि जब धरती पर चारों ओर त्राहि-त्राहि मच गई,चारों ओर अत्याचार,अनाचार का साम्राज्य फैल गया तब भगवान श्रीकृष्ण ने देवकी के आठवें गर्भ के रूप में जन्म लेकर कंस का संहार किया।इस अवसर पर उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न बाल लीलाओं का वर्णन किया।कथा वाचक महाराज जी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने भक्तों का उद्धार व पृथ्वी को दैत्य शक्तियों से मुक्त कराने के लिए अवतार लिया था। उन्होंने कहा कि जब-जब पृथ्वी पर धर्म की हानि होती है,तब-तब भगवान धरती पर अवतरित होते हैं।रेलवे रोड पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग व उनके जन्म लेने के गूढ़ रहस्यों को कथा व्यास ने बेहद संजीदगी के साथ सुनाया।कथा प्रसंग सुनाते हुए कथा व्यास ने बताया कि जब अत्याचारी कंस के पापों से धरती डोलने लगी,तो भगवान कृष्ण को अवतरित होना पड़ा।सात संतानों के बाद जब देवकी गर्भवती हुई,तो उसे अपनी इस संतान की मृत्यु का भय सता रहा था।भगवान की लीला वे स्वयं ही समझ सकते हैं।भगवान कृष्ण के जन्म लेते ही जेल के सभी बंधन टूट गए और भगवान श्रीकृष्ण गोकुल पहुंच गए।कथा का संगीतमयी वर्णन सुन श्रद्धालुगण झूमने लगे।इस दौरान कथा में कई श्रोतागण मौजूद रहे।आपको बता दें कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी 22 जनवरी 2024 को माँ जगतजननी रणकौशला देवी के जन्मोत्सव के चलते श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन मन्दिर परिसर में किया जा रहा है।जिसमे कथा का रसपान कथाव्यास परम् पूज्य पंडित रमाकांत जी महाराज के द्वारा श्रोताओं को कथा का रसपान कराया जा रहा है।वहीं इस बार पारीक्षत बनने का सौभाग्य तहसीलदार अमित दुबे के माता पिता राधामोहन दुबे-श्रीमती रेखा दुबे को प्राप्त हुआ है।चरण सेवक के रूप में अमित दुबे(तहसीलदार)व उनकी पत्नी दिव्या दुबे(उप पुलिस अधीक्षक)को अवसर मिला है।
