बल्देवगढ़ ब्लॉक की गौशालाएं बनी कमाई का अड्डा? बेजुबानों के नाम पर सरकारी राशि का बंदरबांट का आरोप निष्पक्ष जांच की मांग ग्रामीणांचलों उठ रही आवाज।
कागजों में 100 पशु, मौके पर 30 तक ही मिलने का दावा; भरण-पोषण और आहार की राशि के उपयोग की जांच की मांग।
फील्ड आफीसर संचालकों के घरों में बैठते हेरा फेरी कर कागजों में पूर्ति हो जाती।
बल्देवगढ़। बल्देवगढ़ ब्लॉक क्षेत्र में संचालित गौशालाओं की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि कई गौशालाओं में सरकारी रिकॉर्ड में पशुओं की संख्या अधिक दर्शाई जा रही है, जबकि जमीनी स्तर पर वास्तविक संख्या काफी कम दिखाई देती है। यदि इन आरोपों की जांच होती है तो सरकारी राशि के उपयोग और गौशालाओं की वास्तविक स्थिति को लेकर बड़ा खुलासा सामने आ सकता है।
देखरेख । आजीविका मिशन विभाग एवं पशु विभाग डॉक्टरों कि सहभागिता कि कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े
स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों के मुताबिक कुछ गौशालाओं में कागजों पर करीब 100 पशु दर्ज बताए जाते हैं, जबकि मौके पर लगभग 30 पशु ही दिखाई देने की बात कही जा रही है। पशुओं के भरण-पोषण के लिए मिलने वाली राशि में प्रति पशु ₹40 प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान होने का दावा भी किया जा रहा है। ऐसे में वास्तविक पशु संख्या और रिकॉर्ड में दर्ज संख्या के बीच अंतर होने पर सरकारी राशि के उपयोग पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
गौशालाओं में पशुओं के लिए पर्याप्त चारा, पानी, साफ-सफाई, उपचार और देखरेख की व्यवस्था होना आवश्यक है। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि कागजों में व्यवस्थाएं पूरी दिखाई जाती हैं, जबकि जमीन पर तस्वीर अलग नजर आती है।
‘बेजुबानों’ के नाम पर राशि, लेकिन जवाबदेही किसकी?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में अंतर है तो इसकी निगरानी करने वाली व्यवस्था कहां है? क्या संबंधित अधिकारियों द्वारा नियमित भौतिक सत्यापन किया जा रहा है? पशुओं की संख्या का सत्यापन, चारा वितरण और भुगतान की प्रक्रिया की जांच कब हुई—इन सवालों के जवाब सामने आना जरूरी है।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि बल्देवगढ़ ब्लॉक की एक एक गौशालाओं का अचानक और निष्पक्ष भौतिक सत्यता लाई जाये।