आशिकान-ए-रसूल का उमड़ा सैलाब: सुन्नी मुस्लिम आम जमात दल्ली राजहरा ने नातिया प्रोग्राम से मनाया ईद मिलादुन्नबी का जश्न
MOHAMMAD IMRAN RAJA BALOD CHHATTISGARH
दल्ली राजहरा। पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद मुस्तफा (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के यौम-ए-पैदाइश यानी जश्ने ईद मिलादुन्नबी का त्योहार पूरे देश सहित स्थानीय स्तर पर बेहद अकीदत, एहतराम और मजहबी शान-ओ-शौकत के साथ मनाया गया। इस मुकद्दस मौके पर सुन्नी मुस्लिम आम जमात द्वारा एक अज़ीम-ओ-शान (भव्य) नातिया मुशायरे और मजहबी जलसे का आयोजन किया गया जिसमे आशिकान-ए-रसूल का हुजूम उमड़ा रहा और पूरा मजमा नबी की आमद के नारों से गूंजता रहा।
देश 24 लाइव न्यूज़ -राजा खान रिपोर्टर जिला ब्यूरो बालोद
पवित्र कुरान पाक की तिलावत से रूहानी आगाज
मजहबी महफिल की शुरुआत तय समय पर मुकद्दस कुरान की तिलावत के साथ की गई। इसके बाद बारगाहे रिसालत में अकीदत के फूल पेश करने का सिलसिला शुरू हुआ। सुन्नी मुस्लिम आम जमात के पदाधिकारियों ने मंच पर तशरीफ लाए उलेमा-ए-किराम और बालोद जिले के विभिन्न हिस्सों से आए मेहमान शायरों व नातख्वाहों का फूल-मालाओं से इस्तकबाल (स्वागत) किया।
नातख्वाहों मे आलिमा कायनात परवीन रायपुर और ज़ीनत परवीन कुलयतुल बैनतुल कादरिया दूधी नगर उत्तर प्रदेश ने शानदार मजहबी जलसे का आगाज किया
मशहूर नातख्वाहों के कलाम पर झूमा जनसैलाब
कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण रहे मशहूर नातख्वाहों ने जैसे ही माइक संभाला, महफिल का समां बंध गया। नातख्वाहों ने अपनी सुरीली और रूहानी आवाजों में एक से बढ़कर एक नातिया कलाम और मनकबत पेश किए। हुजूर की शान, उनकी पैदाइश के वाकयात और मदीने की याद में पढ़े गए शेरों पर अवाम झूम उठी। जलसे में मौजूद हजारों जायरीन ने अपने हाथ उठाकर और ‘नारा-ए-तकबीर, अल्लाह-हू-अकबर’ व ‘नारा-ए-रिसालत, या रसूलल्लाह’ के बुलंद नारों से शायरों का हौसला बढ़ाया।
पैगंबर साहब की शिक्षाओं पर डाला गया प्रकाश
महफिल में तशरीफ लाए मुख्य वक्ता और उलेमा-ए-किराम ने पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब की सीरत (जीवनी) और उनकी पाक शिक्षाओं पर विस्तार से रोशनी डाली। उलेमाओं ने अपने बयान में कहा, “हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पूरी दुनिया के लिए रहमत (वरदान) बनकर आए थे। उन्होंने हमेशा गरीबों की मदद करने, यतीमों को गले लगाने और हर इंसान से मोहब्बत करने का रास्ता दिखाया। सच्चा मुसलमान वही है जो पैगंबर साहब के बताए रास्ते पर चले और समाज में अमन कायम करे।”
मुल्क में अमन-चैन की दुआ और तबर्रुक तकसीम
कलाम और बयानात का सिलसिला मुकम्मल होने के बाद मुल्क और पूरी इंसानियत के लिए दुआ का दौर शुरू हुआ। उलेमाओं ने देश में आपसी भाईचारा, कौमी एकता, अमन-ओ-अमान और खुशहाली कायम रहने के लिए खुदा की बारगाह में विशेष दुआएं मांगीं। कार्यक्रम के आखिर में सलातो-सलामी का नजराना पेश किया गया। इसके बाद सुन्नी मुस्लिम आम जमात की ओर से कार्यक्रम में आए सभी अकीदतमंदों के लिए बड़े पैमाने पर तबर्रुक (शीरनी) और लंगर का वितरण किया गया।
इस आयोजन को कामयाब बनाने में सुन्नी मुस्लिम आम जमात दल्ली राजहरा के कमेटी मेम्बर एडवोकेट इसराईल शाह, छोटे मियां, तैयब अंसारी, एस अंसारी,हाफ़िज़ मुनववर साहब, हाफ़िज़ नसीम रज़ा साहब, हाफ़िज़ सिमनानी साहब,हाफ़िज़ अयूब साहब, जमील अहमद, आर आई साहब, अशरफ मेमोन यासिर फारूकी, सुहैल फारूकी,मो इक़बाल, मो आरिफ, निजामुद्दीन फौजी साहब,मो कादिर,मो इरशाद,इकराम रेहमानी,शेख असलम भाई, साजिद खान, असलम कुरैशी,अकरम हुसैन,शेख नबी खान, मो इमरान,वली खान,शकील खान, एडवोकेट साकिर,मिस्किन, सद्दाम,अनवर हुसैन,अब्दुल जब्बार,मुस्ताक,शफी बक्श, जुबैर अहमद, राजा हसन, मुक्कु, शोएब, सलामत,जावेद खान, कासिम कुरैशी, फारूक कुरैशी, सोहेल, सज्जाद कुरैशी, दानिश अहमद,हनीफ कुरैशी, शेख चाँद,सिराज खान, आदिल, अरमान रेहमानी, असलम भाई, अफ़रोज़ खान, इस्तियाक अली , फिरोज खान जुगनू, अब्दुल इब्राहिम, गुड्डू भाई, राजा खान, मो मुस्तफा,मुख्तार,सोबी,रिजवान ,नासिर भाई ,शेखअकरम,रज़ाभाई ,जुनैद,मतीन कुरैशी,मीर रफीक अली, जफिर कुरैशी, राजा कुरैशी, शब्बीर कुरैशी शेख मुमताज़, यासीन कुरैशी,रमीज़ शाह, फारूक, शमशेर अली, निज़ाम भाई, शेख चाँद, इरशाद बबलू शाह, पाशा भाई, मसूद भाई, राजू हसन, हसन अशरफी, मोसिन रज़ा, फैज़ान अंसारी, कमरान अंसारी, दानिश, तौफ़ीक खान,अकबर भाई,अल्ताफ भाई,परवेज, मो यसिन, सिकंदर, रियाज़ुद्दीन कादरी, नईम कादरी, मो अब्बास, युसूफ भाई,नियाज़ भाई, इदुल भाई, बादशाह भाई, आदिल भाई, आसिफ भाई, आरिफ खान,मुजफ्फर हुसैन,मुजस्सर हुसैन, सैयद आज़ाद अली, निस्सु भाई, मो अब्बास ,इमरान खान (राजा),लाल मोहम्मद (लालु),आदि का विशेष सहयोग रहा I