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80वां स्वतंत्रता दिवस : रेलवे इंस्टीट्यूट दल्ली राजहरा में गूंजे देशभक्ति के सुर, विजेता बने दीपक सोना

रेलवे इंस्टीट्यूट दल्ली राजहरा द्वारा 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशभक्ति एकल गीत प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया। इंस्टीट्यूट के हाल में आयोजित इस प्रतियोगिता में पूरा हॉल दर्शकों से खचाखच भरा हुआ था।

 

प्रतियोगिता का शुभारंभ 15 अगस्त की संध्या ठीक 5 बजे राष्ट्रगान के साथ हुआ। आयु सीमा न होने के कारण सभी वर्ग के प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कुल 16 प्रतिभागियों ने अलग-अलग स्थानों से आकर अपनी प्रस्तुति दी। कार्यक्रम की शुरुआत से ही देशभक्ति गीतों से पूरा माहौल देशभक्ति के रंग में रंग गया और दर्शकों ने तालियों की गूंज से सभी का उत्साह बढ़ाया।

इस प्रतियोगिता का सबसे भावुक और प्रेरणादायक पल तब आया जब सबसे कम उम्र की प्रतिभागी 9 वर्षीय यशस्वी जैन ने “ऐ मेरे वतन के लोगों” गीत प्रस्तुत किया। यशस्वी ने अपनी सुंदर आवाज और बेहतरीन तालमेल के साथ पूरे देशभक्ति भाव में लीन होकर गीत गाया। उनके प्रदर्शन पर पूरे हॉल में तालियों की गूंज उठी। चारों निर्णायकगणों ने भी यशस्वी की प्रस्तुति की विशेष सराहना की। इस दौरान उपस्थित यशस्वी की माताजी भावुक नजर आईं।

कार्यक्रम का एक और विशेष आकर्षण पिता-पुत्री की जुगलबंदी रही। श्री विकास पटेल एवं कुमारी ख्याति पटेल ने एक साथ मंच पर आकर अपनी उम्दा प्रस्तुति देकर दर्शकों का दिल जीत लिया।

प्रतियोगियों ने “ऐ मेरे वतन के लोगों”, “जहाँ डाल डाल पर सोने की चिड़िया”, “संदेसे आते हैं”, “जिंदगी मौत न बन जाए संभलो यारो”, “नफरत की लाठी तोड़ो”, “चल उड़ जा रे पंछी के अब ये देश हुआ बेगाना”, “हर कर्म अपना करेंगे” जैसे देशभक्ति गीतों की सुंदर प्रस्तुति दी।

 

प्रतियोगिता में दो प्रतिभागियों के अंक बराबर होने पर उन्हें पुनः एक और गीत प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया। इसके पश्चात परिणाम घोषित किए गए। प्रथम स्थान श्री दीपक सोना ने प्राप्त किया। उन्हें नगद 2500 रुपये और ट्रॉफी प्रदान की गई। द्वितीय स्थान श्री श्रीनिवास राव को मिला। उन्हें 1500 रुपये नगद और ट्रॉफी से सम्मानित किया गया। तृतीय स्थान मोहम्मद अजगर ने हासिल किया। उन्हें 1000 रुपये नगद और ट्रॉफी दी गई। तृतीय पुरस्कार की ट्रॉफी भाई प्रशांत बोडके की ओर से प्रदान की गई।

सांत्वना पुरस्कार के रूप में कुमारी देबोलीना भट्टाचार्जी, श्री देवेश कुमार तथा कुमारी यशस्वी जैन को चुना गया। सांत्वना पुरस्कार श्रीमती मुनमुन सिन्हा द्वारा प्रदान किए गए। कार्यक्रम की ट्रॉफी भाई किशोर कराडे, भारतीय जीवन बीमा निगम सलाहकार की ओर से प्रदान की गई।

कार्यक्रम में निर्णायक की भूमिका श्री शंभू बिस्वास, श्री अशोक आइच, श्रीमती टी ज्योति एवं श्रीमती मुनमुन सिन्हा ने निभाई। कार्यक्रम के अंत में सभी निर्णायकगणों को इंस्टीट्यूट की ओर से प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। समापन राष्ट्रगीत के साथ श्रीमती टी ज्योति द्वारा किया गया।

कार्यक्रम को सफल बनाने में सभी सहयोगियों को विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

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