विश्व आदिवासी दिवस पर शासकीय अवकाश की मांग तेज, राष्ट्रपति के नाम सौंपा गया ज्ञापन
आदिवासी समाज ने कहा—अवकाश के अभाव में कर्मचारी नहीं हो पाते सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शामिल, परंपराओं के सम्मान की उठाई मांग
टीकमगढ़। विश्व आदिवासी दिवस पर शासकीय अवकाश घोषित किए जाने की मांग को लेकर आदिवासी समाज ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपते हुए केंद्र सरकार से सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया है। समाज का कहना है कि विश्व आदिवासी दिवस आदिवासी समुदाय का महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और सामाजिक पर्व है, लेकिन शासकीय अवकाश नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में शासकीय सेवाओं में कार्यरत कर्मचारी इसमें शामिल नहीं हो पाते।
ज्ञापन में कहा गया है कि देशभर में विश्व आदिवासी दिवस उत्साह और परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है। यह दिन आदिवासी समाज की संस्कृति, इतिहास, परंपराओं और अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर है। इसके बावजूद अवकाश नहीं होने से कई कर्मचारी अपने समाज के सामूहिक आयोजनों से वंचित रह जाते हैं।
आदिवासी समाज ने ज्ञापन में भगवान बिरसा मुंडा की जयंती का भी उल्लेख करते हुए कहा कि 15 नवंबर को आयोजित कार्यक्रमों में भी अनेक शासकीय कर्मचारी अपनी सेवाओं के कारण पूर्ण रूप से भागीदारी नहीं कर पाते। समाज का मानना है कि ऐसे महत्वपूर्ण अवसरों पर शासकीय अवकाश मिलने से सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और सामाजिक एकजुटता को बल मिलेगा।
ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति से अनुरोध किया गया है कि विश्व आदिवासी दिवस पर शासकीय अवकाश घोषित करने पर विचार किया जाए, ताकि देशभर के आदिवासी कर्मचारी और समाज के लोग अपनी सांस्कृतिक परंपराओं एवं सामुदायिक कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग ले सकें।
आदिवासी समाज ने उम्मीद जताई है कि उनकी इस मांग पर केंद्र सरकार संवेदनशीलता के साथ विचार करेगी और समाज की सांस्कृतिक भावनाओं के अनुरूप उचित
