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टीकमगढ़ में जलकरविंसगति

टीकमगढ़ में जलकरविसंगति स्थगित हो सके आपका स्नेह र्मागदर्शन महत्वपूर्ण जनहितार्थ र्सावभौमिक है*।

 

टीकमगढ़ में जलकर और उपभोक्ता प्रभारों में की गई अप्रत्याशित वृद्धि की ओर आकर्षित करना चाहते हैं। यह आदेश न केवल आम जनता पर एक अनुचित आर्थिक बोझ है, बल्कि विधिक, प्रक्रियात्मक और संवैधानिक सिद्धांतों के भी पूर्णतः विपरीत है जिन पर तत्काल पुनर्विचार किया जाना अत्यंत आवश्यक है:

1. ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के राजपत्र का गलत एवं अवैधानिक उपयोग

राज्य सरकार द्वारा जारी राजपत्र (दिनांक 29.12.2021) मुख्य रूप से ‘ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016’ के प्रभावी क्रियान्वयन और कचरा प्रबंधन के लिए जारी किया गया था। ठोस अपशिष्ट (कचरा प्रबंधन) और जलकर (Water Tax) दो पूरी तरह से पृथक मदें हैं। कचरा प्रबंधन के नियमों की आड़ लेकर जनता पर जलकर का अतिरिक्त बोझ डालना सीधे तौर पर ‘अधिकार क्षेत्र का दुरुपयोग’ (Colorable Legislation) है,।

2. चुनी हुई परिषद की अनुपस्थिति में प्रशासक द्वारा टैक्स निर्धारण असंवैधानिक

लोकतांत्रिक और नगरीय निकाय व्यवस्था में नागरिकों पर नया टैक्स लगाने या दरों में वृद्धि करने का वैधानिक अधिकार केवल जनता द्वारा चुनी हुई परिषद की ‘सामान्य सभा’ को होता है। चुनी हुई परिषद की अनुपस्थिति में प्रशासक (कलेक्टर) को केवल दैनिक प्रशासनिक कार्यों के संपादन का अधिकार होता है। शासन के विशिष्ट नियमों और निर्देशों के बिना, प्रशासक स्वतः नागरिकों पर नया आर्थिक कर थोपने वाले विधायी नियम प्रभावी नहीं कर सकते।

3. ‘मदनलाल बनाम न.पा. डबरा (1974)’ के ऐतिहासिक न्यायिक फैसले का खुला उल्लंघन

माननीय उच्च न्यायालय द्वारा स्थापित विधिक नजीर ‘मदनलाल विरुद्ध नगरपालिका परिषद डबरा 1974 (म.प्र.ला.ज. 251 = 1974 ज.ला.ज. 323)’ के सिद्धांत स्पष्ट रूप से व्यवस्था देते हैं कि:

“प्रशासक को नगरपालिका परिषद की समस्त शक्तियाँ प्राप्त अवश्य होती हैं, परंतु यदि शासन ने तत्संबंध में विशिष्ट नियम न बनाए हों, तो प्रशासक द्वारा की गई कर वृद्धि की स्वीकृति पूर्णतः अवैध होगी।”

टीकमगढ़ नगर पालिका द्वारा जारी वर्तमान आदेश इस स्थापित विधिक सिद्धांत का सीधा उल्लंघन करता है।

4. राजपत्र (Gazette) केवल नीतिगत निर्देश है, सीधा कर आदेश नहीं

मध्य प्रदेश राजपत्र (दिनांक 29.12.2021) केवल एक ‘नीतिगत निर्देश’ या रूपरेखा (Framework) प्रदान करता है, जिसके अंतर्गत स्थानीय निकायों को प्रक्रिया का पालन करते हुए दरें संशोधित करने का मार्गदर्शन दिया गया है। राजपत्र स्वयं सीधे तौर पर स्थानीय दरों को लागू नहीं करता। इसके आधार पर स्थानीय स्तर पर बिना जन-सुनवाई या उचित विधिक प्रक्रिया के प्रशासक द्वारा स्वतः दरें (Rates) तय कर देना एक गंभीर प्रक्रियात्मक त्रुटि है।

5. पिछली तारीख (Retrospective) से टैक्स की वसूली विधिक सिद्धांतों के विपरीत

इस कर वृद्धि से संबंधित संकल्प दिनांक 02 मई 2022 को पारित किया गया था, परंतु इसे पिछले महीने यानी 01 अप्रैल 2022 से ही प्रभावी कर दिया गया है। टैक्स और राजस्व मामलों का यह सार्वभौमिक सिद्धांत है कि कोई भी स्थानीय प्राधिकरण बिना किसी विशिष्ट विधायी मंजूरी या पूर्व-अधिसूचना के, पिछली तारीख (Backdate) से टैक्स की वसूली नहीं कर सकता। यह कदम नागरिकों के अधिकारों का हनन है।

आग्रह—

टीकमगढ़ की जनता पहले से ही विभिन्न आर्थिक स्तरों पर संघर्ष कर रही है, ऐसे में बिना उचित विधिक प्रक्रिया और बिना चुनी हुई परिषद के इस प्रकार की अप्रत्याशित कर वृद्धि अत्यंत पीड़ादायक और अवैधानिक है।

अतः आपसे अत्यंत विनम्र प्रार्थना है कि जनहित को सर्वोपरि रखते हुए, उपर्युक्त विधिक त्रुटियों के मद्देनजर इस जलकर वृद्धि के आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त/आस्थगित करने की कृपा करें।

30/6/2026

आपका अपना

(पवन घुवारा ‘भूमिपुत्र’)

टीकमगढ़

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