देश में ‘सिस्टम’ के खिलाफ महाक्रांति का शंखनाद: अमित शर्मा ने फूंका ‘संपूर्ण व्यवस्था परिवर्तन’ का बिगुल!
लखनऊ /मुरादाबाद से राजेश कुमार यादव की खास रिपोर्ट
“78 साल की आजादी या 78 साल का धोखा? जब देश का अन्नदाता कर्ज में डूबा हो, मजदूर दो वक्त की रोटी को तरस रहा हो और पढ़ा-लिखा युवा बेरोजगारी की ठोकरें खा रहा हो, तो समझ लीजिए कि हमें ‘आजादी’ नहीं, सिर्फ ‘शासक’ मिले हैं।” यह तीखे बोल हैं राष्ट्रीय चिंतक और प्रगतिशील जनमोर्चा के रणनीतिकार अमित शर्मा के, जिन्होंने अब देश की सड़ी-गली व्यवस्था को जड़ से उखाड़ फेंकने का संकल्प ले लिया है।
“असली आजादी अभी बाकी है”
मुरादाबाद के एक छोटे से गांव से निकले अमित शर्मा ने सत्ता के गलियारों में हलचल मचा दी है। उनका कहना है कि आज का गरीब और मजदूर खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। राजनीति केवल ‘वोट बैंक’ का खेल बनकर रह गई है। अमित शर्मा ने ऐलान किया है कि अब जनता चुप नहीं बैठेगी। ‘प्रगतिशील जनमोर्चा’ का गठन महज एक संगठन नहीं, बल्कि उन करोड़ों शोषित भारतीयों की आवाज़ है जिन्हें अब तक केवल आश्वासन मिले हैं।
10 राज्यों में ‘परिवर्तन’ की आग, युवाओं का सैलाब तैयार!
अमित शर्मा की यह मुहिम अब एक राष्ट्रीय आंदोलन का रूप ले चुकी है। उत्तर प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र, गुजरात, बिहार और दिल्ली समेत 10 राज्यों में प्रगतिशील जनमोर्चा का विस्तार हो चुका है। अमित शर्मा का लक्ष्य साफ है—संविधान, तर्क और मानवता को ढाल बनाकर युवाओं को सक्रिय राजनीति में लाना।
अमित शर्मा की सीधी चेतावनी:
“हमारा लक्ष्य चुनाव लड़ना नहीं, ‘किंगमेकर’ बनकर व्यवस्था बदलना है।”
“जब तक गरीब-किसान को हक नहीं मिलता, हम चैन से नहीं बैठेंगे।”
“युवा जाग चुका है, अब बदलाव को कोई रोक नहीं पाएगा।”
जनता से अपील:
अमित शर्मा ने देश के हर उस व्यक्ति से जुड़ने की अपील की है जो बदलाव की तड़प रखता है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी पार्टी के खिलाफ नहीं, बल्कि उस ‘सिस्टम’ के खिलाफ है जिसने आम आदमी का गला घोंट रखा है।
