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लखनऊ उत्तरप्रदेश। देवरिया की बीएसए शालिनी श्रीवास्तव पर सख्त सवाल। लखनऊ उत्तरप्रदेश से राजेश कुमार यादव की खास रिपोर्ट

देवरिया की बीएसए शालिनी श्रीवास्तव पर सख्त सवाल —

लखनऊ उत्तरप्रदेश से राजेश कुमार यादव की खास रिपोर्ट

हाईकोर्ट आदेश का अनुपालन न करने पर जांच, आरोप और FIR के बीच न्यायालय-स्तरीय विवाद जारी

📌 मुख्य बिंदु

1. विवाद का केंद्र — शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या

देवरिया (उत्तर प्रदेश) के सरकारी सहायक अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह ने 20 फरवरी को गोर्खपुर स्थित अपने घर में फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने एक वीडियो संदेश और चार पेज का सुसाइड नोट रिकॉर्ड किया था जिसमें वे बीएसए कार्यालय के अधिकारियों पर उत्पीड़न, 16-16 लाख रुपये की मांग और मानसिक प्रताड़ना जैसे गंभीर आरोप लगा रहे थे।

2. हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया गया?

इस प्रकरण में हाईकोर्ट ने पहले मामला सुने जाने पर आदेश जारी किया था कि बहाल किए गए शिक्षकों को वेतन और बहाली सुनिश्चित की जाए। लेकिन जांच में पाया गया कि बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और कार्यालय ने करीब एक साल तक हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया। इसी लापरवाही पर जिला प्रशासन ने कड़ी नाराजगी जताई। �

 

3. जांच दल की पूछताछ और सवाल

डीएम दिव्या मित्तल के नेतृत्व में गठित जांच टीम ने बीएसए कार्यालय में तफ्तीश की। पूछताछ के दौरान यह भी सामने आया कि बीएसए कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब नहीं दे पाईं और कई बिंदुओं पर निरुत्तर रह गईं। �

 

4. FIR और पुलिस जांच

क्रिप्ट में शिक्षक की पत्नी के बयान पर, पुलिस ने बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, बाबू संजीव सिंह और अन्य के खिलाफ FIR दर्ज की है जिन पर आत्महत्या के लिए उकसाने, धमकी देने व भ्रष्ट आचरण के आरोप हैं। �

 

5. प्रशासनिक प्रतिक्रिया और सस्पेंसन संस्तुति

जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला अधिकारियों ने बीएसए शालिनी श्रीवास्तव के सस्पेंड करने की संस्तुति शासन को भेज दी। इस मामले को शासन और पुलिस दोनों स्तरों पर गहनता से जांचा जा रहा है।

6. अतिरिक्त जांच पहलू

पुलिस अब बीएसए और अन्य कर्मचारियों के मोबाइल, सीसीटीवी फुटेज, बैंक स्टेटमेंट और कॉल डिटेल्स की जांच भी कर रही है ताकि आरोपों की सत्यता और लेन-देन के रिकॉर्ड का विश्लेषण हो सके।

📍 समग्र स्थिति

यह मामला अब केवल एक शिक्षक की आत्महत्या नहीं रह गया है, बल्कि शिक्षा विभाग की प्रणाली, आदेशों के अनुपालन, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे गंभीर विषयों पर बड़ा सवाल उठाता है। जांच बढ़ चुकी है, FIR दर्ज हो चुकी है और प्रशासन ने कार्रवाई की रूपरेखा भी तय की है।

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