देवरिया में सेवा समाप्ति से बहाली तक: बेसिक शिक्षा विभाग में बड़ा यू-टर्न!
जांच, सेवा समाप्ति, फिर “अनुकम्पा” पर पुनर्नियुक्ति- उठे पारदर्शिता पर सवाल, फाइल खुली शासन ने फिर मांगा जांच रिपोर्ट।
लखनऊ उत्तरप्रदेश से राजेश कुमार यादव की खास रिपोर्ट
3 जुलाई 2025: को दिशा के बैठक में हुए बवाल से शुरू हुआ मामला अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। जांच, बेसिक में कार्यपटल बदलाव और सेवा समाप्ति की संस्तुति के बाद अब उन्हीं संविदा कर्मियों की दूसरी जगह नियुक्ति सामने आने से विभाग एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है।
इस पुरे जांच और कार्रवाई का क्रम में,
8 जुलाई 2025: जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने सीडीओ प्रत्यूष पांडे के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की।
9 जुलाई 2025: बीआरसी स्तर पर जांच, एक सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत।
19 जुलाई 2025: बीएसए कार्यालय में 14 कर्मचारियों का कार्यपटल परिवर्तन।
6 अगस्त 2025: को डीएम ने जांच रिपोर्ट के आधार पर दो संविदा कर्मियों, जिसमें दिवाकर मिश्रा (सहायक लेखाकार) व कुलनन्दन मिश्रा (सहायक कंप्यूटर ऑपरेटर) को सेवानिवृत्त शिक्षिका शशिबाला वर्मा क़ी सैलरी निकालने के मामले में दोषी पाए जाने पर सेवा समाप्ति की संस्तुति बेसिक शिक्षा विभाग को दीं थी। साथ ही तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी देवरिया सदर विजय पाल नारायण त्रिपाठी के विरुद्ध निलंबन/विभागीय कार्रवाई की संस्तुति भी भेज दिया था।
8 अगस्त 2025: को बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा सेवा प्रदाता फर्म M/s. Wiztech Services Pvt. Ltd., लखनऊ को अनुबंध समाप्त करने के आदेश जारी हुए थे।
लेकिन अब इस मामले में नया खुलासा हुआ हैं, ताजा जानकारी विभागीय पत्र व सूत्रों के अनुसार,
29 जनवरी 2026: को बरहज विधायक द्वारा मण्डलायुक्त, गोरखपुर को पत्र भेजे जाने के बाद परीक्षण कराया गया।
13 फरवरी 2026: को जिलाधिकारी ने “अनुकम्पा के आधार पर” दोनों की बहाली का आदेश दिया।
18 फरवरी 2026: को बीएसए देवरिया शालिनी श्रीवास्तव द्वारा आदेश जारी किया गया।
वही 19 फरवरी 2026: को दिवाकर मिश्र (सहायक लेखाकार) खण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, बैतालपुर, व कुलनन्दन मिश्र (कम्प्यूटर ऑपरेटर) खण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, गौरीबाजार में अपना कार्यभार ग्रहण कर लिए।
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है ज़ब बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव व बाबू संजीव सिंह पर लगे आरोपों के बाद गोरखपुर के गुलरिहा थाने में एफ.आई.आर. दर्ज मामला में शासन स्तर से जांच शुरू हुआ हैं, सूत्रों के अनुसार पुनः इस मामले को लेकर शासन ने बीएसए कार्यालय देवरिया से रिपोर्ट मांगी है।
वही स्थानीय सूत्रों व डीएम के आदेश के अनुसार दावा है कि सेवा समाप्ति की जानकारी सार्वजनिक होने के बाद भी अनुकम्पा पर संबंधित संविदा कर्मियों कि दूसरी जगह तैनाती कर दी गई। इसे लेकर यह सवाल उठ रहा है कि— क्या सेवा समाप्ति का आदेश अंतिम रूप से लागू नहीं हुआ था, क्या सच सामने आने के बाद अनुकम्पा पर पुनः बहाली हो सकती हैं? जबकि उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट का कई मामलों में कहना है कि विभागीय जांच में आरोप प्रमाणित हो तो अनुकम्पा नियुक्ति कोई वैधानिक अधिकार नहीं है।
यदि जांच में तथ्य सही पाए गए तो बीएसए देवरिया और खंड शिक्षा अधिकारी पर कार्रवाई उस समय क्यों नहीं हुई, और जो दो संविदा कर्मचारी दोषी मिले तो उनको अनुकम्पा का हवाला देकर पूरी फाइल क्यों बंद कर दीं गई?, यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि गंभीर प्रक्रिया संबंधी त्रुटि का रूप ले सकता है, क्यों कि यह मामला दिशा के बैठ में हुए बवाल के बाद जांच कि पूरी प्रक्रिया हुई थी।
देवरिया बेसिक शिक्षा विभाग पहले से ही वित्तीय अनियमितता और कार्यप्रणाली को लेकर सवालों में रहा है। अब सेवा समाप्ति की संस्तुति के बाद पुनः नियुक्ति की खबर ने पारदर्शिता और जवाबदेही पर नए प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें शासन स्तर की कार्रवाई पर टिकी हैं कि आखिर इस पूरे प्रकरण में अंतिम निष्कर्ष क्या हुआ औऱ आगे जांच आख्या मांगने
