बेगूसराय में छठी मैया के नाम से जाना जाता है बभनगामा गांव
नन्दकिशोर दास
बेगूसराय ब्यूरो। जिले के बभनगामा को छठी मैया गांव के नाम से भी जाना जाता है। जहां सूर्य पूजा और छठ पर्व को पुरानी परंपरा, आस्था और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर नावकोठी प्रखंड के पहसारा पंचायत गांव एक ऐसा गांव है, जिसका नाम सुनकर ही भक्ति और आस्था की लहर दौड़ जाती है। वो नाम है ‘छठी मैया गांव’। इस गांव का असली नाम भले बाभनगामा हो, लेकिन लोग इसे अब छठी मैया गांव के नाम से ही जानते हैं। सरकारी साइन बोर्ड में भी छठी मैया चौक तक लिखा हुआ है। लोगों का मानना है कि बिहार में यह इकलौता गांव है।जिसकी आस्था छठी मैया से जुड़ी हुई है। गांव के बुजुर्गों ने बताया कि सदियों पहले यहां छठ पर्व के दौरान एक के बाद एक हादसे होते रहता था। लोग घाट पर डूब जाते और हर साल किसी ना किसी की जानें चली जाती थी। लगातार ऐसी घटनाओं से गांव में भय और निराशा का माहौल बना रहता था। गांव के बुजुर्गों ने मिलकर तय किया कि अब छठ पर्व केवल नदी किनारे नहीं, बल्कि गांव में ही सूर्यदेव की मूर्ति स्थापित कर पूजा-अर्चना के रूप में मनाया जाएगा। कहा जाता है कि उसी साल से हादसे रुक गए और गांव वालों की मन्नतें पूरी होने लगी। धीरे-धीरे गांव की पहचान ‘छठी मैया गांव’ के रूप में होने लगी। गांव के छात्र नीतीश कुमार ने बताया कि उसके स्कूल में भी गांव का नाम छठी मैया गांव के तौर पर ही लिया जाता है। रामशंकर मालाकार कहते हैं कि गांव की हर सांस में छठ की आस्था बसती है। सूर्य पूजा अब परंपरा बन चुकी है। छठ के तीनों दिन पूरा गांव भक्ति में डूबा रहता है। गांव के विनोद शाह बताते हैं कि हर साल गांव वाले चंदा इकट्ठा कर सूर्यदेवता की पूजा और मेला का आयोजन करते हैं।
