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जब अल्फ़ाज़ बोल उठे : ‘प्रतिनिधि ग़ज़लें’ में मिला जीवन का रंग

अलीगढ़ : वरिष्ठ गजलकार अशोक ‘अंजुम’ का नया संकलन प्रतिनिधि ग़ज़लें : अशोक ‘अंजुम’ हाल ही में प्रकाशित हुआ है। पुस्तक का संपादन डॉ. गिरिराजशरण अग्रवाल ने किया है और इसे हिंदी साहित्य निकेतन ने प्रकाशित किया है।

पुस्तक समीक्षा 

इस संग्रह में कवि की चुनी हुई 105 ग़ज़लें शामिल की गई हैं। सहज और सरल भाषा में गहरी बातें कह देना अंजुम की गजलों की विशेषता मानी जाती है। इन गजलों में प्रेम, परिवार और रिश्तों की संवेदनशीलता के साथ-साथ राजनीति, समाज और पर्यावरण जैसे विषयों पर भी प्रभावी अभिव्यक्ति दिखाई देती है।

वरिष्ठ गजलकार अशोक ‘अंजुम’

अंजुम की गजलों में व्यंग्य की धार भी देखने को मिलती है। राजनीतिक और सामाजिक हालातों पर तीखा प्रहार करती पंक्तियां पाठकों का ध्यान खींच लेती हैं।

अशोक अंजुम अब तक 72 पुस्तकें लिख और संपादित कर चुके हैं। इनमें से लगभग एक दर्जन उनकी ग़ज़लों पर केंद्रित हैं। उनकी कई पुस्तकों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान भी प्राप्त हुआ है।

यह नया संकलन ‘हिंदी गजल यात्रा’ श्रृंखला का हिस्सा है। साहित्य जगत का मानना है कि यह संग्रह गजल-प्रेमियों के लिए पढ़ने योग्य और संग्रहणीय कृति है।

 

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