कटनी। मकान मालिक और किरायेदार के विवाद ने पुलिस की मनमानी को उजागर कर दिया। शहर के अल्फर्टगंज में मकान खाली कराने की कार्रवाई के दौरान पुलिसकर्मियों ने सभी सीमाएं लांघते हुए नाबालिग बच्ची को घर से घसीटकर बाहर निकाला और सरेआम पीट दिया। यह पूरा घटनाक्रम सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया और सोशल मीडिया पर वायरल होते ही लोगों में आक्रोश फैल गया।
मकान की बिक्री के बाद किरायेदार परिवार घर खाली नहीं कर रहा था। कानूनी प्रक्रिया अपनाने के बजाय नगर निगम कर्मियों, कुछ नेताओं और पुलिसकर्मियों के गठजोड़ से जबरन कार्रवाई शुरू कर दी गई। घर को जर्जर बताते हुए गिराने का प्रयास हुआ और विरोध करने पर महिला और बच्चों को घसीटा गया। इसी दौरान एक महिला पुलिसकर्मी ने नाबालिग बच्ची को बेरहमी से पीटा। बच्ची बेहोश होकर गिर पड़ी और गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती करानी पड़ी, जहां वह पिछले 36 घंटे से उपचाररत है।
कार्रवाई उलटी पड़ी, पुलिस भागी
मौके पर मौजूद नगर निगम कर्मचारी और पुलिसकर्मी भीड़ जुटते ही कार्रवाई छोड़कर भाग खड़े हुए। अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर पुलिस किसके निर्देश पर मौके पर पहुंची और नाबालिग के खिलाफ इतनी बर्बर कार्रवाई किस कानून के तहत हुई?पुराना रिकॉर्ड दागदार
यह पहला मौका नहीं है जब कटनी पुलिस पर नाबालिगों के साथ हिंसक व्यवहार का आरोप लगा हो। गत 31 मई 2025 को तत्कालीन सीएसपी ख्याति मिश्रा के पारिवारिक विवाद में पुलिस पर उनके बेटे को पीटने और घसीटकर वाहन की डिग्गी में डालने के आरोप लगे थे। उस मामले में पत्रकारों से भी पुलिस का टकराव हुआ था। तब डीएसपी प्रभात शुक्ला और महिला थाना प्रभारी मंजू शर्मा को जबलपुर अटैच किया गया था, जबकि कोतवाली टीआई अजय सिंह कार्रवाई से बच निकले थे।अब क्या होगा?
ताजा घटना को दो दिन से दबाने का प्रयास किया जा रहा था, लेकिन वीडियो वायरल होने से मामला उछल गया है। अब सबकी नजरें पुलिस अधीक्षक पर हैं कि वह इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाते हैं।

