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बिना नोटिस के मकान गिराए जाने पर पीड़ित परिवार परेशान सूचना पर पहुंचे सदर विधायक एसडीएम को लगाई फटकार

उत्तर प्रदेश के बाँदा में बिना नोटिस गिराया गया पचासों साल पुराना मकान, एक ब्राह्मण परिवार खुले आसमान के नीचे बेघर, प्रशासनिक बुलडोज़र पर उठे सवाल

रिपोर्ट: – अनुराग तिवारी राजनीति संवाददाता

बिना नोटिस के तहसील प्रशासन द्वारा तोड़ा हुआ मकान

उत्तर प्रदेश के बाँदा जनपद के बबेरू तहसील कस्बा में एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाली घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। यहाँ एक ब्राह्मण परिवार का पचासों साल पुराना मकान प्रशासन द्वारा बिना किसी पूर्व नोटिस या विधिवत प्रक्रिया के बुलडोज़र चलवाकर गिरा दिया गया। पीड़ित परिवार का दावा है कि उनके पास मकान से संबंधित सम्पूर्ण दस्तावेज़, रजिस्ट्री, रसीदें और वैध कागजात मौजूद हैं, बावजूद इसके उन्हें एक अपराधी की तरह बेदखल कर दिया गया। बारिश में टूटा आशियाना, खुले में शरण – यह घटना तब और अधिक दर्दनाक बन गई जब यह कार्रवाई भारी बारिश के बीच की गई।

सूचना पर मौके पर पहुंचे सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी फोन से बबेरू एसडीएम को कड़ी फटकार लगते हुए

मकान टूटने से पीड़ित परिवार के बुज़ुर्ग, महिलाएं और बच्चे खुले आसमान के नीचे ठहरने को मजबूर हो गए। बच्चों की किताबें, ज़रूरी सामान, गृहस्थी के सारे साधन मलबे में दब गए। परिवार की वृद्ध महिला रोते हुए कहती है:> “हमने कभी सोचा भी नहीं था कि बिना किसी चेतावनी के हमारा घर ऐसे तोड़ दिया जाएगा, जैसे हम देशद्रोही हों… हमारे पुरखों का आशियाना पलभर में उजड़ गया।”प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल -पीड़ित पक्ष का आरोप है कि यह कार्रवाई राजनीतिक दबाव में की गई। उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील पटेल पर आरोप लगाया है कि उन्हीं के इशारे पर यह कार्रवाई हुई। ज़मीन को सरकारी बताते हुए प्रशासन ने घर को ज़मींदोज कर दिया, लेकिन कभी भी परिवार को नोटिस नहीं भेजा गया, न ही किसी तरह की सुनवाई का अवसर दिया गया।स्थानीय नागरिकों ने कड़ी नाराज़गी जताते हुए कहा कि:> “जब सरकार प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में सबको मकान दे रही है, तब जिला स्तर पर अधिकारियों द्वारा इस तरह की तानाशाही कार्यवाही संविधान के खिलाफ है।”

राजनीतिक हलकों में उबाल, विधायक पहुँचे स्थल पर

मामला जब सदर विधायक तक पहुँचा, तो उन्होंने बिना देरी किए खुद बबेरू पहुँचकर पीड़ित परिवार से मुलाक़ात की। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। विधायक ने कहा:> “यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि भाजपा के कार्यकर्ताओं के प्रति भी अन्याय है। बिना नोटिस किसी का घर गिराना सीधा-सीधा तानाशाही है। क्या यही ‘सुशासन’ है जिसकी दुहाई दी जाती है?”उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों से भी जवाब माँगा और उप जिलाधिकारी को चेतावनी दी कि यदि भविष्य में ऐसी मनमानी दोहराई गई तो कड़ी प्रशासनिक कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना से योगी सरकार की छवि धूमिल हो रही है।स्थानीय जनआक्रोश व मांगें – इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में लोगों में भारी आक्रोश है। क्षेत्रीय सामाजिक संगठनों और ग्रामीणों ने एक सुर में इस कार्रवाई की निंदा की और तत्काल पीड़ित परिवार को पुनर्वास, मुआवज़ा और न्याय देने की मांग की है।

लोगों की माँगें:उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए दोषी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों पर कार्रवाई होपीड़ित परिवार को वैकल्पिक आवास और आर्थिक सहायता दी जाए ,ऐसी कार्रवाई से पहले विधिसम्मत प्रक्रिया अपनाई जाए,निष्कर्ष: एक घर नहीं, एक व्यवस्था उजड़ी – बबेरू की यह घटना सिर्फ एक मकान गिरने की नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनहीनता और राजनैतिक दबाव में लिए गए फैसलों की झलक है। जब न्याय की उम्मीद लगाने वाला आम नागरिक खुद को बेबस महसूस करता है, तो यह लोकतंत्र की आत्मा पर चोट के समान है।

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